वैश्विक युद्ध के दौरान राजस्थान के हालातों पर ग्राउंड रिपोर्ट : गैस से लेकर पेट्रोल-डीजल तक किफायत की कोशिशें, राजधानी में फिलहाल संकट नहीं
गैस संकट: रसोई से बाजार तक असर
उपयोग पर नियंत्रण के तहत एलपीजी आपूर्ति अब तय प्रतिशत सीमा में ही की जाएगी। यदि किसी जिले में गैस शेष रहती है, तो कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिला समिति स्थानीय जरूरतों के अनुसार उसका पुनर्वितरण तय करेगी। इस व्यवस्था से संसाधनों का संतुलित उपयोग और सभी क्षेत्रों में समान आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
जयपुर। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक स्तर पर जारी संघर्ष का असर अब सीधे राजस्थान की रसोई और सड़कों तक पहुंचता दिख रहा है। राज्य में फिलहाल ईंधन की आपूर्ति सामान्य दिखाई दे रही है, लेकिन गैस और पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति किफायत से की जा रही है ताकि संकट के हालात ना हों। युद्ध लंबा खिंचता है, तो सबसे पहले एलपीजी गैस, फिर डीजल और पेट्रोल की सप्लाई पर गहरा असर पड़ना तय माना जा रहा है। राजस्थान में करीब 1.65 करोड़ घरेलू गैस उपभोक्ता हैं, जिन्हें हर महीने लगभग 1.25 करोड़ सिलेंडर मिलते हैं। यानी रोजाना करीब 4 लाख सिलेंडर की खपत होती है, लेकिन विशेषज्ञों का अनुमान है कि वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने पर यह आपूर्ति घटकर सिर्फ 1.60 लाख सिलेंडर प्रतिदिन रह सकती है। यानी करीब 60 फीसदी की सीधी कमी। स्थिति सिर्फ घरेलू गैस तक सीमित नहीं है। कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई पर भी असर दिखने लगा है, जिससे होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट कारोबार ठप होने की कगार पर हैं।
गैस संकट: रसोई से बाजार तक असर
मिडिल ईस्ट से आने वाली गैस सप्लाई पर युद्ध का सीधा असर पड़ रहा है। भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का 60 से 65 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। ऐसे में राजस्थान जैसे भू-आवेष्ठित राज्य में संकट और तेजी से गहराने की आशंका है। बुकिंग सिस्टम में भी बदलाव किया गया है। अब उपभोक्ताओं को 25 दिन के अंतराल के बाद भी सिलेण्डर मिलने में परेशानी सामने आ रही हैं।
डीजल-पेट्रोल बढ़ती मांग, सीमित तैयारी
एलपीजी के साथ-साथ डीजल और पेट्रोल की स्थिति भी चिंताजनक हो सकती हैं। प्रदेश में रोज 90 से 100 लाख लीटर डीजल और 35 से 40 लाख लीटर पेट्रोल की खपत होती हैं। अगर अंतरराष्ट्रीय सप्लाई बाधित होती है, तो इन दोनों ईंधनों की कीमतों में उछाल और उपलब्धता में कमी एक साथ देखने को मिल सकती है। पंप संचालकों के स्टॉक की पेमेंट मोड को कंपनियों ने कम कर दिया है, जिससे छोटे पंप संचालकों के लिए मुसीबत हो गई है, पहले 15 दिन तक भुगतान करने का सिस्टम था, लेकिन मिडिल ईस्ट के संकट के चलते कंपनियों ने ये सिस्टम खत्म कर दिया हैं।
कमर्शियल सेक्टर पर तगड़ा झटका
राज्य में रोजाना करीब 40 हजार कमर्शियल गैस सिलेंडरों की खपत होती है। सप्लाई बाधित होने से होटल, रेस्टोरेंट और छोटे फूड व्यवसाय सीधे प्रभावित होने लगे हैं। इससे रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ता नजर आ रहा हैं।
मुख्य कारण-क्यों गहराएगा संकट
- 60 से 65% गैस आयात पर निर्भरता
- 80 से 85% सप्लाई मिडिल ईस्ट से
- सीमित स्टोरेज क्षमता
- समुद्र से दूर होने के कारण सप्लाई में देरी
बढ़ती खपत, घटती वैकल्पिक व्यवस्था
डीजल 90-100 लाख लीटर 60-70 लाख लीटर 30 प्रतिशत
पेट्रोल 35-40 लाख लीटर 25-30 लाख लीटर 25 प्रतिशत
ऑनलाइन सिलेण्डर बुक कराया था, लेकिन मैसेज नहीं मिला तो अब मैं एजेंसी पर आई हूं, अब मुझे सिलेण्डर का मैसेज मिला है। सिलेण्डर डिलीवरी हो जाएगा।
-माया
नॉ र्मल बुकिंग हो रही हैं, एलपीजी की कोई मारामारी नहीं है। अब आॅनलाइन बुकिंग के नंबर दिए गए हैं। पहले नंबर पर जरूर परेशानी थी।
-पुखराज विश्नोई
पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति सुचारू हैं। घरेलू एलपीजी की आपूर्ति 100 फीसदी की जा रही हैं, जबकि कॉमर्शियल सिलेण्डर भी आवश्यकतानुसार सप्लाई किए जा रहे हैं।
-सुमित गोदारा, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री
फि लहाल पेट्रोल-डीजल की प्रदेश में कोई समस्या नहीं है, रोजाना की डिमांड के अनुसार र्इंधन उपलब्ध कराया जा रहा हैं। डिमांड के अनुसार तेल कंपनियों से ईंधन पूरा मिल रहा हैं।
- सुमित बगई, संरक्षक राजस्थान पेट्रोल-डीजल एसोसिएशन
पेट्रोल-डीजल का स्टॉक पर्याप्त हैं, इसकी कोई कमी नहीं है। डिमांड के अनुसार कंज्यूमर को मुहैया करवाया जा रहा हैं।
- निशा, पंप संचालक
प हले हम मोबाइल से गैस बुक कराते थे, अब ऑनलाइन बुकिंग हो रही है, इसका मैसेज भी मिल रहा है, इससे आसानी हुई हैं।
- ओम प्रितो शर्मा

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