राजस्थान में आठ नए जिलों में विशेष न्यायालय अधिसूचित, पोक्सो मामलों की सुनवाई को मिलेगी गति
पीड़ितों को समयबद्ध न्याय मिलने में भी सहायता
राजस्थान सरकार ने लैंगिक अपराधों से बालकों के संरक्षण को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया। सरकार से जारी अधिसूचना के अनुसार राज्य में आठ जिलों में विशेष न्यायालयों का विनिर्देशन किया गया। यह अधिसूचना 8 जनवरी 2026 को जारी की गई।
जयपुर। राजस्थान सरकार ने लैंगिक अपराधों से बालकों के संरक्षण को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार से जारी अधिसूचना के अनुसार राज्य में आठ जिलों में विशेष न्यायालयों का विनिर्देशन किया गया है। यह अधिसूचना 8 जनवरी 2026 को जारी की गई। लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 की धारा 28 तथा बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 की धारा 25 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार ने माननीय मुख्य न्यायाधिपति, राजस्थान उच्च न्यायालय के परामर्श से यह निर्णय लिया है। इसके तहत जिला एवं सेशन न्यायाधीश को विशेष न्यायालय के रूप में नामित किया गया है।
अधिसूचना के अनुसार फलौदी, डीडवाना, खैरथल, ब्यावर, बाड़मेर, डीग, कोटपूतली और सलूम्बर जिलों में जिला एवं सेशन न्यायाधीश अपने-अपने क्षेत्राधिकार में विशेष न्यायालय के रूप में कार्य करेंगे। इन न्यायालयों में विशेष रूप से पोक्सो अधिनियम से जुड़े मामलों की सुनवाई की जाएगी। सरकार के इस फैसले से बच्चों के विरुद्ध होने वाले लैंगिक अपराधों के मामलों में त्वरित और प्रभावी न्याय सुनिश्चित होने की उम्मीद है। साथ ही पीड़ितों को समयबद्ध न्याय मिलने में भी सहायता मिलेगी। यह कदम राज्य सरकार की बाल सुरक्षा और न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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