गहलोत की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी को लग सकता है झटका, ACB और RAS के बीच टकराहट ने कांग्रेस सरकार की बढ़ाई चिंता
मामला आरएएस वर्सेज आरपीएस होने का अंदेशा
आरएएस के आंदोलन की लगाम सीएमओ में तैनात अफसरों के हाथों में है।
जयपुर। प्रदेश में पिछले पांच दिनों से भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो एसीबी और आरएएस के बीच चल रही टकराहट ने राज्य सरकार की चिंता को बढ़ा दिया है। सरकार को चिन्ता है कि इस टकराहट के चलते मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू की गई जीरो टॉलरेंस की नीति पर ब्रेक लगने की आशंका है। आरएएस की परिषद एसीबी के अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़ी हुई है, जबकि एसीबी के अधिकारी इसका विरोध कर रहे हैं। इस मसले के हल के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्य सचिव उषा शर्मा और गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार को जिम्मेदारी सौंपी है। आरएएस के आंदोलन की लगाम सीएमओ में तैनात अफसरों के हाथों में है।
इस वजह से हुआ विवाद
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने 26 अप्रैल को राष्टÑीय पोषण अभियान में डिस्ट्रिक्ट कोआॅर्डिनेटर लगाने के नाम पर रिश्वत लेते दो कार्मिकों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। एसीबी ने जब इस मामले में आरोपी से पूछताछ की तो उन्होंने उच्चाधिकारियों का नाम लिया। इसके बाद एसीबी पूछताछ के लिए तत्कालीन एडिशनल डायरेक्टर भागचंद बधाल को लेकर गई। उसी देर शाम उन्हें छोड़ भी दिया। भागचंद बधाल को बिना नोटिस के इस तरह जबरन पूछताछ के लिए लेकर जाना आरएएस को नागवार गुजरा। आरएएस ने 28 अप्रैल को इसका विरोध जताया और मुख्य सचिव से मुलाकात की। एसीबी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक दिनेश एमएन की मौजूदगी में मुख्य सचिव ने घटना की पूरी जानकारी ली थी। इस दौरान आरएएस अधिकारियों ने साफ कहा कि माफी से काम नहीं होगा। जब तक कार्रवाई नहीं होगी, बात खत्म नहीं होगी। आरएएस का विरोध जारी है। सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार को चिंता है कि आरएएस एसोसिएशन की मांग को स्वीकार करते हुए एसीबी के अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है तो इसका आरपीएस एसोसिएशन भी विरोध जता सकती है। पिछले तीन साल से एसीबी की ओर से की जा रही ताबड़तोड़ कार्रवाइयों से उसकी देशभर में तारीफ हो रही है, लेकिन सिविल सर्विसेज के अफसरों की नींद उड़ी हुई है।
गहलोत का था पहला संदेश
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश की सत्ता संभालने के एक दिन बाद ही संदेश दिश था कि किसी भी सूरत में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं होगा। गहलोत ने 20 दिसम्बर 2018 को अपने अधिकारियों के साथ बैठक में यह संदेश दिया था।

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