जंतर-मंतर स्मारक ने यूनेस्को में शामिल होने के 16 वर्ष किए पूरे, 2010 में लिस्ट में किया था शामिल
वैज्ञानिक उपयोगिता और ऐतिहासिक महत्व की विस्तार से जानकारी दी
जयपुर। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल जयपुर के ऐतिहासिक जंतर-मंतर स्मारक ने शुक्रवार को अपनी इस उपलब्धि के 16 वर्ष पूरे कर लिए। इस अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम के तहत विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों को स्मारक का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को सम्राट यंत्र सहित अन्य खगोलीय यंत्रों की कार्यप्रणाली, उनकी वैज्ञानिक उपयोगिता और ऐतिहासिक महत्व की विस्तार से जानकारी दी।
अधीक्षक प्रतिभा यादव ने बताया कि भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने प्राचीन भारतीय खगोल विज्ञान की वैज्ञानिक सोच और सटीक गणनाओं को करीब से समझा। विशेषज्ञों ने बताया कि जंतर-मंतर केवल एक ऐतिहासिक स्मारक नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध वैज्ञानिक विरासत का जीवंत प्रमाण है, जहां स्थापित यंत्र आज भी समय, ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति और खगोलीय घटनाओं के अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारत की वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ना, खगोल विज्ञान के प्रति उनकी रुचि बढ़ाना तथा विश्व धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना रहा। विद्यार्थियों ने यंत्रों के संचालन और उनके वैज्ञानिक सिद्धांतों के बारे में जिज्ञासापूर्ण प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से उत्तर दिया।

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