JAWAHAR KALA KENDRA : संगीत के जरिए कलाकारों ने बहाई रस की गंगा, दृष्टिबाधित कलाकारों की सुरीली हारमोनी बैंड प्रस्तुति

कलाकारों ने राजस्थानी संस्कृति के रंग में सभी को रंग दिया

JAWAHAR KALA KENDRA : संगीत के जरिए कलाकारों ने बहाई रस की गंगा, दृष्टिबाधित कलाकारों की सुरीली हारमोनी बैंड प्रस्तुति
जेकेके की ओर से आयोजित तीन दिवसीय म्यूजिकल सिम्फनी कार्यक्रम मंगलवार को संपन्न हुआ। कार्यक्रम के अंतिम दिन रंगायन के मंच पर पंजाब, गुजरात और अरुणाचल प्रदेश से आए दृष्टिबाधित दस कलाकारों के तीन बैंड्स की प्रस्तुति हुई। हारमोनी नामक इस प्रस्तुति ने सभी को भावविभोर कर दिया। गुजरात से आए कलाकारों ने कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए लता मंगेशकर के गीतों को अपनी प्रस्तुति में शामिल किया। अंकिता चौहान और राजेश ठाकुर ने नैनों में बदरा छाए... गीत से मिठास घोली।

जयपुर। जेकेके की ओर से आयोजित तीन दिवसीय म्यूजिकल सिम्फनी कार्यक्रम मंगलवार को संपन्न हुआ। कार्यक्रम के अंतिम दिन रंगायन के मंच पर पंजाब, गुजरात और अरुणाचल प्रदेश से आए दृष्टिबाधित दस कलाकारों के तीन बैंड्स की प्रस्तुति हुई। हारमोनी नामक इस प्रस्तुति ने सभी को भावविभोर कर दिया। गुजरात से आए कलाकारों ने कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए लता मंगेशकर के गीतों को अपनी प्रस्तुति में शामिल किया। अंकिता चौहान और राजेश ठाकुर ने नैनों में बदरा छाए... गीत से मिठास घोली। इसके बाद आज मौसम बड़ा बेईमान है... गीत ने माहौल को जीवंत कर दिया। इसके बाद भक्तिमय माहौल बनाते हुए उन्होंने राम आएंगे तो अंगना सजाएंगे.. भजन की प्रस्तुति दी गई। वहीं, राजस्थानी गीतों का सुरीला मैशअप प्रस्तुत कर कलाकारों ने राजस्थानी संस्कृति के रंग में सभी को रंग दिया। इसके बाद कार्यक्रम का रुख पंजाब की ओर हुआ और चंडीगढ़ से आए कलाकारों ने मैं तैनूं समझावां की... गीत से शुरुआत की। रोमी कुमार ने गायन के साथ मधुर बांसुरी वादन से श्रोताओं का मन मोह लिया।

इसके बाद दो दिल मिल रहे हैं... और लंबी जुदाई... जैसे गीतों प्रस्तुत दी और माहियां वे..., अंबर तो आई हुई हूर सोनिए... की बनूं दुनिया दां सच्चे बादशाह.. और छल्ला जैसे पंजाबी लोकगीतों से उन्होंने शाम में विविध संस्कृति के रंग भर दिए। कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति नॉर्थ-ईस्ट से आए लेट नाइट मेलोडीज बैंड द्वारा दी गई। अरुणाचल प्रदेश के कलाकार न्योन्योक तलोम ने जा जिन जा.. लोकगीत से शुरुआत करते हुए माहौल में पूवार्ेत्तर की लोकधुनों की मिठास घोल दी। इसके बाद उन्होंने राजस्थान की झलक पेश करते हुए लोकप्रिय गीत चौधरी गाया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। साथ ही उन्होंने रूप तेरा मस्ताना.., प्यार तेरा दीवाना.. जैसे सदाबहार गीतों से शाम को रूमानी रंग दिया। इन बेमिसाल कलाकारों ने असम के प्रसिद्ध गायक जुबीन गर्ग को ट्रिब्यूट देते हुए जाने क्या चाहे मन..., फिर दिल क्या करे.. और जरा सी दिल में दे जगह.. जैसे गीतों से शाम को यादगार बना दिया। 

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