खनन नीति में बदलाव से चूना उद्योग को मिलेगी नई संजीवनी, छोटे खनन पट्टों के आवंटन की तैयारी
2 हजार से अधिक इकाइयों पर मंडरा रहा था बंदी का संकट
जयपुर। राज्य सरकार की खनन नीति में प्रस्तावित बदलाव से राजस्थान के चूना (लाइम) उद्योग को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार अब छोटे खनन पट्टों के आवंटन की तैयारी कर रही है, जिससे कच्चे माल के संकट से जूझ रही करीब 2 हजार लाइम आधारित इकाइयों को नया जीवन मिल सकेगा। दरअसल, वर्ष 2015-16 में लाइमस्टोन को मेजर मिनरल घोषित किए जाने के बाद छोटे खनन पट्टों का आवंटन लगभग बंद हो गया था। इसके बाद केमिकल ग्रेड लाइमस्टोन के बड़े ब्लॉक मुख्य रूप से सीमेंट कंपनियों को आवंटित होने लगे, जिससे क्विक लाइम और हाइड्रेटेड लाइम बनाने वाले छोटे एवं मध्यम उद्योगों के सामने कच्चे माल का गंभीर संकट खड़ा हो गया।
राजस्थान में देश के 90 प्रतिशत से अधिक उच्च गुणवत्ता वाले केमिकल ग्रेड लाइमस्टोन के भंडार मौजूद हैं। ये भंडार मुख्य रूप से नागौर, जोधपुर और पाली जिलों में स्थित हैं। इसी खनिज के आधार पर प्रदेश में क्विक लाइम और हाइड्रेटेड लाइम का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। इन उत्पादों की मांग स्टील, पेपर, शुगर, जिंक, एल्युमिनियम, फार्मास्यूटिकल, वाटर ट्रीटमेंट, सड़क निर्माण और उर्वरक जैसे अनेक उद्योगों में रहती है। लेकिन कच्चे माल की उपलब्धता घटने से प्रदेश का लाइम उद्योग लगातार संकट का सामना कर रहा था। सरकार की नई नीति के तहत यदि छोटे खनन पट्टों का आवंटन शुरू होता है तो न केवल उद्योगों को नियमित कच्चा माल मिल सकेगा, बल्कि हजारों लोगों के रोजगार भी सुरक्षित होंगे। उद्योग जगत का मानना है कि यह कदम प्रदेश के पारंपरिक लाइम उद्योग को पुनर्जीवित करने के साथ औद्योगिक उत्पादन और निवेश को भी नई गति देगा।

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