मालवीय नगर विधानसभा निगम क्षेत्र : कच्ची बस्तियों को पुनर्वास, कॉलोनियों को नियमन का इंतजार; क्षेत्र में सर्वाधिक नालों की समय पर साफ-सफाई नहीं
घनी आबादी के चलते बाजारों में पार्किंग समस्या बड़ी चुनौती
जयपुर। मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र में जयपुर नगर निगम मे 73-87 तक के वार्ड हैं। क्षेत्रफल के हिसाब से यहां आबादी दूसरे अधिकांश विधानसभा क्षेत्रों से ज्यादा है। लेकिन बुनियादी सुविधाएं उस अनुरूप नहीं है। यहां करीब आधा दर्जन कच्ची बस्तियां हैं। जहां मानसून में रहना दूभर है। सालों से लोग इनके नियमितीकरण कर विकास की बांटझोह रहे हैं। लेकिन इंतजार अभी भी खत्म नहीं हुआ है। पुर्नवास की भी कई बार कवायद हुई लेकिन वह भी अधूरी ही रही। क्षेत्र में सर्वाधिक नाले हैं। लेकिन इनकी सफाई का समयानुसार मैकेनिज्म नहीं है। ऐसे में मानसून में नाले उफान पर होते हैं। सफाई होती भी है तो क्षेत्रवासियों के लिए आफत आती है। क्योंकि निस्तारण मोनिटरिंग के अभाव में नालों का मलबा सड़क और लोगों के घर के किनारे ढ़ेरों में बदबू फैलाते जमा दिख जाता है। घनी आबादी के चलते बाजारों में पार्किंग समस्या बड़ी चुनौती है, जिसे हल करने का अभी तक कोई प्लान निगम के पास नहीं है। सर्वाधिक बुनियादी समस्याएं महेश नगर, बरकत नगर, गोपालपुरा बाईपास क्षेत्र, मालवीय नगर सेक्टर्स में है। उम्मीद है कि नई बनने वाली शहरी सरकार समस्या निदान का कोई जमीनी रोडमैप तैयार करेगी।
- 1 सीवरेज और ड्रेनेज-जलापूर्ति सिस्टम
- पुरानी और क्षमता से अधिक दबाव वाली सीवर लाइनें बार-बार जाम होती हैं और फूटती हैं।
- सड़कों पर गंदा पानी बहना, जलभराव और सेक्टर 1, 11, बरकत नगर, महेश नगर, झालाना केलगिरी, सर्वानंद मार्ग क्षेत्रों में जलभराव आम समस्या है।
- गर्मी में पेयजल आपूर्ति गडबड़ाती है। टैंकरों के भरोसे आपूर्ति निर्भर है।
2 सड़कें और गड्ढों से परेशान आम जन
- यातायात दबाव व आबादी अधिक होने से कई सड़कें टूटी-फूटी हैं।
- नई सड़कों पर गलत ढलान होने से हल्की बारिश में भी पानी भर जाता है। सीवर ओवरफ्लो के कारण सड़कें डूब जाती हैं।
- निर्माण कार्यों के दौरान पाइपलाइन टूटने और मरम्मत में देरी की शिकायतें रहती हैं।
3 क्षेत्र में फैली गंदगी से बीमारियों का खतरा
- कचरे के ढेर कई जगहों पर आम रास्तों में लंबे समय तक लगे रहते हैं।
- नियमित कचरा संग्रहण में अनियमितता। हालांकि अन्य क्षेत्रों की तुलना में कम।
- मालवीय नगर जोन में नालों की संख्या सबसे ज्यादा है। समय पर सफाई नहीं होती। मानसून में सड़क किनारे मिट्टी-मलबे के ढेर लगे रहते हैं। बदबू से लोग परेशान होते हैं।
4 भोजपुरा कच्ची बस्ती, गुरु तेग बहादुर नगर, झालाना डूंगरी कच्ची बस्ती और कुंडा बस्ती जैसी जगहों पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव।
- पट्टे, लैंड डीड्स, और नियमितीकरण की दर्जनों कॉलोनियों में लंबे समय से मांग, कच्ची बस्तियों का पुर्नवास-नियमितीकरण बड़ी चुनौती।
- झालाना नाले पर अतिक्रमण और कब्जे की समस्या।
5 अन्य महत्वपूर्ण चुनौतियां
- स्ट्रीट लाइट, कई जगह लंबे समय तक बंद रहती हैं।
- सड़क किनारे, नालों और फैसिलिटी एरिया पर अवैध कब्जे।
- ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या, व्यस्त इलाकों जैसे जेएलएन मार्ग, वर्ल्ड ट्रेड पार्क, गौरव टॉवर आदि बड़ी जगहों सहित महेश नगर, बरकत नगर, मालवीय नगर में घनी आबादी में पार्किंग की कमी।
- पार्को और सार्वजनिक स्थानों के रखरखाव की कमी।
- जनसंख्या दबाव के अनुरूप के कारण घनी आबादी वाला जोन है, ऐसे में बुनियादी ढांचे पर बोझ बढ़ा है।
फि र से भाजपा की शहरी सरकार बनी तो क्षेत्र में सीवरेज और डेनेज सिस्टम बड़ी समस्या के समाधान, जाम से राहत को ट्रेफिक प्लानिंग, स्लीप लेन, लेफ्ट टर्न डिवाइडर्स बनाने का प्लान बनाने का प्रयास करेंगे। गॉर्डन की सारसंभाल ठीक से हो, इसके लिए इन्हें विकास समितियों के हैंडओवर करना चाहिए। कुछ कॉलोनियों का बाकी नियमितीकरण भी जल्द कराने की जरुरत है।
- पुनीत कर्नावट, निर्वतमान डिप्टी मेयर व वार्ड 76 पार्षद।
मे रे क्षेत्र की 99 फीसदी सड़कें बन गई। चार हाईमास्ट लाइटें, तीन जिम, स्पॉर्ट्स क्लब, सीनियर सिटीजन सेंटर बनाया। मानसिंहपुरा, रैगर बस्ती में सीवरजें लाइनें ठीक कराने की जरुरत है। नियमितीकरण भी बाकी है। देवनगर में अमृत योजना में पानी की टंकी का काम भी बाकी है, जिसें कराएंगे।
-रमेश सैनी, वार्ड 133 पार्षद(अब वार्ड नंबर 77)

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