राजस्थान में बढ़ी मानसूनी बारिश, लेकिन जलवायु संकट भी हुआ गहरा, 2050 के बाद और बढ़ेगी भीषण गर्मी

सीईईडब्ल्यू की नई रिपोर्ट में चेतावनी

राजस्थान में बढ़ी मानसूनी बारिश, लेकिन जलवायु संकट भी हुआ गहरा, 2050 के बाद और बढ़ेगी भीषण गर्मी
थिंक टैंक सीईईडब्ल्यू के एआई प्लेटफॉर्म 'क्रेविस' की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में औसत मानसूनी वर्षा में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, असंतुलित बारिश, भीषण गर्मी और सूखे का प्रकोप बढ़ने का अनुमान है, जिससे भविष्य में जल संसाधनों और कृषि क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

जयपुर। राजस्थान में मानसूनी बारिश का औसत बढ़ा है लेकिन इसके साथ जलवायु परिवर्तन के खतरे भी तेजी से गहराते जा रहे हैं। काउंसिल आॅन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) की एआई आधारित क्लाइमेट इंटेलिजेंस रिपोर्ट क्रेविस के अनुसार राज्य में 1981-2010 की तुलना में 2011-2024 के दौरान औसत मानसूनी वर्षा में 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि भविष्य में बारिश का स्वरूप अधिक अनिश्चित होगा और भीषण गर्मी का दौर लगातार लंबा होता जाएगा। 

जयपुर में बुधवार को आयोजित स्ट्रेंथनिंग क्लाइमेट रेजिलिएंस: एआई ड्रिवन क्लाइमेट डिसीजंस एंड एक्शंस विषयक राउंडटेबल में सीईईडब्ल्यू के विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान में देश का मानसून दो विपरीत तस्वीरें पेश कर रहा है। एक ओर कई राज्य बाढ़ से जूझ रहे हैं वहीं दूसरी ओर अनेक क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश होने के कारण जल संकट गहरा रहा है। जुलाई मध्य तक देश के 166 प्रमुख जलाशयों में कुल क्षमता का केवल 34 प्रतिशत पानी ही उपलब्ध था। रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में 1981-2010 के दौरान औसत मौसमी वर्षा 471 एमएम थी, जो 2011-2024 में बढ़कर 598 एमएम हो गई। हालांकि 2051-2070 तक इसके घटकर 569 एमएम रहने का अनुमान है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका अर्थ यह नहीं है कि बारिश कम होगी, बल्कि वर्षा का वितरण अधिक असंतुलित और अनिश्चित होगा। कहीं अत्यधिक बारिश तो कहीं लंबे सूखे का दौर देखने को मिल सकता है। अध्ययन में बताया गया है कि पश्चिमी और उत्तरी राजस्थान में गर्मी और सूखे का खतरा सबसे अधिक रहेगा जबकि दक्षिण-पूर्वी जिलों में अधिक वर्षा की संभावना है। मौजूदा सुपर अल नीनो इन परिस्थितियों को और गंभीर बना रहा है, जिससे जल संसाधनों, खेती, पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

गर्मी के दिनों में होगी बढ़ोतरी: रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाले दिनों की संख्या 2031-2050 तक बढ़कर 176 दिन और 2051-2070 तक 185 दिन प्रतिवर्ष हो सकती है। वहीं 25 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाली गर्म रातें भी तेजी से बढ़ेंगी, जिससे लोगों के स्वास्थ्य, श्रम उत्पादकता और शहरी जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

-क्या है क्रेविस: सीईईडब्ल्यू के फेलो डॉ. विश्वास चितले ने बताया कि क्रेविस सीईईडब्ल्यू का अपनी तरह का पहला क्लाइमेट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म है। जो कि नीति-निर्माताओं, शहरी योजनाकारों और प्रशासन को जिला स्तर पर वैज्ञानिक जलवायु विश्लेषण उपलब्ध कराकर हीट एक्शन प्लान, आपदा प्रबंधन, जल संसाधन और आधारभूत ढांचे से जुड़े फैसलों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगा। 

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