लंबित बिलों के भुगतान को लेकर वित्त विभाग के नए निर्देश जारी, दोहरे भुगतान और पुराने इनवॉइस पर रोक
परिवर्तित इनवॉइस बनाकर भुगतान का प्रयास नहीं किया जाए
वित्त (कोष एवं लेखा) विभाग ने IFMS के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 के लंबित बिलों के निस्तारण के लिए दिशा-निर्देश जारी । 31 मार्च 2026 तक भुगतान न होने वाले क्लेम स्वतः निरस्त माने जाएंगे। सभी DDO और खाताधारकों को टोकन तिथि अनुसार बिल पुनः अपलोड करना होगा।
जयपुर। वित्त (कोष एवं लेखा) विभाग ने आईएफएमएस के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 के लंबित बिलों के निस्तारण को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों, कार्यालयाध्यक्षों, आहरण एवं वितरण अधिकारियों (DDO) और पीडी खाताधारकों को निर्देशित किया है कि 31 मार्च 2026 तक लंबित रहे बिलों का निपटान नए वित्तीय वर्ष 2026-27 में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाए। निर्देशों के अनुसार, भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के प्रावधानों के तहत SNA-SPARSH से जुड़े वे सभी क्लेम, जिनका भुगतान 31 मार्च 2026 तक नहीं हो सका, स्वतः निरस्त माने जाएंगे। कार्मिकों एवं पेंशनर्स से जुड़े जीपीएफ, एसआईपीएफ, लोन, विदड्रॉल और लीव एन्कैशमेंट जैसे दावों को टोकन तिथि की प्राथमिकता के आधार पर पुनः प्रस्तुत करना होगा।
निर्माण कार्यों से जुड़े और अन्य श्रेणी के लंबित बिलों को भी टोकन तिथि के क्रम में पुनः आईएफएमएस पर अपलोड किया जाएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि पुराने बिलों के विरुद्ध नए या परिवर्तित इनवॉइस बनाकर भुगतान का प्रयास नहीं किया जाए, अन्यथा संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे। साथ ही, नए वित्तीय वर्ष में केवल नवीन बजट मदों का उपयोग सुनिश्चित करने और दोहरे भुगतान से बचने के निर्देश भी दिए गए हैं।

Comment List