घुमंतू जाति के लोगों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का काम करता है घुमंतू जाति उत्थान न्यास : दुर्गादास
एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाकर जीवन यापन करते हैं
घुमंतू जाति उत्थान न्यास के अखिल भारतीय घुमंतू कार्य प्रमुख बताया कि देशभर में करीब 4 करोड़ घुमंतू जाति के लोग अभी समाज की मुख्य धारा से दूर एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाकर जीवन यापन करते हैं।
जयपुर। घुमंतू जाति उत्थान न्यास के अखिल भारतीय घुमंतू कार्य प्रमुख बताया कि देशभर में करीब 4 करोड़ घुमंतू जाति के लोग अभी समाज की मुख्य धारा से दूर एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाकर जीवन यापन करते हैं। जयपुर के सांगानेर क्षेत्र स्थित प्रताप नगर में घुमंतू जाति उत्थान न्यास जयपुर प्रांत के कार्यालय का गुरुवार को शुभारंभ करते हुए दुर्गादास ने बताया कि घुमंतू जाति के लोगों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए यह संस्था काम करती है और देश भर में करीब चार करोड लोग ऐसे हैं जो समाज की मुख्य धारा से अभी दूर है। यह न्यास उनको उनके दस्तावेज एकत्रित कर उपलब्ध कराना केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं से इनको लवांवित करवाना शिक्षित करने के लिए छात्रावासों का निर्माण करवाने के साथ ही उनके स्वास्थ्य को लेकर के भी न्यासा समय-समय पर काम करता रहता है।
उन्होंने बताया कि घुमंतू जाति के लोगों के पास अभी रोजगार के ज्यादा संसाधन उपलब्ध नहीं है। इसको लेकर भी न्यास उनको रोजगार की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए कौशल विकास के काम सीखने का भी काम करता है। इन लोगों की धर्म आस्था में महापुरुषों के प्रति आस्था बनी रहे इसको लेकर भी न्यासा काम करता है और उनके प्रेरक इतिहास के लेखन का काम भी किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राजस्थान में करीब 50 लाख इस समाज के मौजूद हैं और इसमें करीब 32 जातियों को शामिल किया गया है। इसके अलावा इसमें उपजातियां भी हैं।

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