ऑपरेशन ‘भोजारिष्ट’ : नशे की विषबेलों पर कहर बनकर टूटा ANTF का खौफ, 6 वर्षों से फरार, 25 हजार के इनामी अंतरराज्यीय नशा सरगना भोपालसिंह को दबोचा
कर्ज से शुरू हुआ अपराध का सफर
ऑपरेशन ‘भोजारिष्ट’ के तहत एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने फरार नशा तस्कर भोपालसिंह को मध्यप्रदेश से गिरफ्तार किया। आरोपी पर कई राज्यों में नशे की तस्करी के मामले दर्ज थे। भोपालसिंह ने कर्ज चुकाने के लिए नशे की तस्करी शुरू की थी। एटीएस और ANTF की टीम की संयुक्त कार्रवाई से गिरफ्तारी हुई।
जयपुर। नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन ‘भोजारिष्ट’ के तहत एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पिछले 06 वर्षों से फरार, मध्यप्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों में वांछित 25,000 रुपये के इनामी अंतरराज्यीय नशा तस्कर भोपालसिंह को ANTF ने मध्यप्रदेश से गिरफ्तार कर लिया।
एटीएस एवं ANTF के महानिरीक्षक पुलिस श्री विकास कुमार ने बताया कि यह कार्रवाई अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस दिनेश एम.एन. के कुशल मार्गदर्शन एवं दिशा-निर्देशन में की गई। लगातार सघन प्रयासों के परिणामस्वरूप एनडीपीएस एक्ट के गंभीर प्रकरणों में फरार चल रहे आरोपी को दबोचा गया।
कर्ज से शुरू हुआ अपराध का सफर :
गिरफ्तार आरोपी भोपालसिंह उम्र 50 वर्ष, निवासी ढाकनी, थाना मनासा, जिला नीमच (मध्यप्रदेश) ने पूछताछ में बताया कि माता की बीमारी, खेती में नुकसान, पहली पत्नी के निधन और दूसरी शादी के खर्च ने उसे भारी कर्ज में डुबो दिया।
कर्ज से उबरने के लिए उसने खेती छोड़कर नशे की तस्करी का रास्ता अपनाया :
कर्ज तो चुका दिया, लेकिन इस अवैध धंधे ने उसके सिर पर आधा दर्जन से अधिक आपराधिक मुकदमे लाद दिए। काले धन का बड़ा हिस्सा न्यायालयीन लड़ाइयों, फरारी और छिपने में खर्च हो गया, जिससे अंततः वह फिर कंगाली की हालत में पहुँच गया।
एक के गहनों की सनक, कई घरों की बर्बादी :
दूसरी शादी के बाद आरोपी अपनी पत्नी को सोने के गहनों से सजाने की सनक में ऐसा डूबा कि उसने मेवाड़-मारवाड़ के दूरदराज इलाकों तक नशे का साम्राज्य फैला दिया।
जहाँ एक ओर नई पत्नी हर साल नए गहनों से संवरती रही, वहीं दूसरी ओर नशे की गिरफ्त में आए अनगिनत परिवारों की महिलाओं के गहने उतरते चले गए।
औषधि और जहर-दोहरा खेल :
फरारी के दौरान भोपालसिंह कभी गुजरात-महाराष्ट्र में अश्वगंधा की खेती करता, तो मौका मिलते ही मध्यप्रदेश लौटकर अफीम व डोडा-चूरा की तस्करी में जुट जाता।
राजस्थान के मेवाड़-मारवाड़ क्षेत्र के तस्करों को मध्यप्रदेश बुलाकर वह मुंहमांगे दामों पर नशीला पदार्थ सप्लाई करता और दूरस्थ क्षेत्रों तक मौत का जाल फैलाता रहा।
पिता के पट्टे से कालाबाजारी की शुरुआत :
भोपालसिंह के पिता के नाम वर्षों तक अफीम की खेती का सरकारी पट्टा रहा। इसी का फायदा उठाकर आरोपी ने चोरी-छुपे उपज का हिस्सा बाजार में बेचने की शुरुआत की।
मुकदमों के बढ़ने पर सरकार ने पिता का पट्टा निरस्त कर दिया, जिसके बाद आरोपी आसपास के काश्तकारों से 400–500 रुपये किलो में डोडा-चूरा खरीदकर 2000–2500 रुपए किलो में बेचने लगा, जिससे उसे कई गुना मुनाफा होता था।
एस्कॉर्ट बनकर बढ़ाया साम्राज्य :
सिर्फ सप्लाई ही नहीं, बल्कि भोपालसिंह मेवाड़-मारवाड़ के तस्करों की डोडा-चूरा से भरी गाड़ियों को मध्यप्रदेश से सुरक्षित निकालने का एस्कॉर्ट ठेका भी लेता था।
इससे उसका मुनाफा और नेटवर्क दोनों तेजी से बढ़े और उसकी पैठ पंजाब व गुजरात तक फैल गई।
पकड़े जाने की पटकथा : छलिये को उसी के जाल में फंसाया
मुखबिर से मिली पुख्ता जानकारी के बाद ANTF ने आरोपी से माल की बड़ी खेप के लिए संपर्क साधा।
लालच में आकर भोपालसिंह 20 जनवरी के आसपास अपने गांव आने को तैयार हो गया।
गांव के अंदर दबिश जोखिम भरी होने के कारण ANTF ने भुगतान के बहाने उसे गांव से बाहर खेत पर बुलाया।
तड़के सुबह से टीम ने खेत के आसपास गुप्त घेरा डाला।
टोह लेने पहुंचे भोपालसिंह को चारों ओर से घेरकर मौके पर ही दबोच लिया गया।
कार्यवाही में अहम भूमिका :
इस पूरी कार्रवाई में ANTF एवं ATS मुख्यालय जयपुर की विशेष भूमिका रही।

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