नाबालिग की हत्या मामले में पुलिस का पंचनामा नहीं बनाना गंभीर, बाल अपचारी सहित 2 की याचिका खारिज
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने मई 2022 में दौसा जिले के मंडावर थाना इलाके में 15 साल के किशोर की हत्या के मामले में पुलिस की ओर से मृतक का पंचनामा तैयार नहीं करने को गंभीर चूक बताया है। अदालत ने कहा कि यदि परिजनों ने पोस्टमार्टम से मना किया था, तब भी अस्पताल में मौजूद पुलिस अधिकारी का दायित्व था कि वह शव का पंचनामा तैयार करता। यह पुलिस जांच की गंभीर और प्रथम दृष्टया जानबूझकर की गई कमी है। वहीं अदालत ने बाल अपचारी सहित आरोपी राजेन्द्र की आपराधिक पुनर्विचार याचिकाएं भी खारिज कर दी। जस्टिस रवि चिरानिया ने कहा कि आरोपी के खिलाफ कोर्ट ने 7 अक्टूबर 2024 को प्रसंज्ञान ले लिया है और इस स्तर पर आरोपी को जमानत नहीं दे सकते।
आरोपी पक्ष की ओर से कहा गया कि यह घटना 12 मई 2022 की है और एफआईआर देरी से 15 जून 2022 को दर्ज कराई है। मृतक के पिता ने शुरू में पुलिस को लिखित में किसी के खिलाफ शिकायत नहीं होने की बात कही थी और पोस्टमार्टम से भी इनकार किया था। पुलिस ने जांच के बाद अंतिम रिपोर्ट पेश कर दी थी, लेकिन बाद में कोर्ट ने परिवादी की प्रोटेस्ट पिटिशन पर 7 अक्टूबर 2024 को संज्ञान लेकर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए। इसके विरोध में परिवादी के अधिवक्ता अभिषेक पाराशर ने कहा कि आरोपी और उसके परिजनों ने जांच प्रभावित की और पोस्टमार्टम नहीं होने दिया। मृतक का अंतिम संस्कार देर रात जल्दबाजी में हुआ। पुलिस ने भी शव का पंचनामा नहीं बनाया और विधिक प्रक्रिया का पालन किए शव परिजनों को सौंप दिया। जिससे जांच प्रक्रिया में गंभीर खामियां रही। जिस पर अदालत ने कहा कि भले ही परिवादी ने तब पोस्टमार्टम से मना किया हो, लेकिन मौके पर पुलिस अधिकारी का दायित्व था कि वह शव का पंचनामा तैयार कर विधिक कार्रवाई करता।

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