PCC की कमान पर प्रभावशाली वर्गों का वर्चस्व: प्रदेश कांग्रेस में 31 वर्ष ब्राह्मण, 27 वर्ष जाट अध्यक्ष रहे; एससी, एसटी और अल्पसंख्यक समुदाय अब भी प्रतिनिधित्व से वंचित
जातीय समीकरणों को लेकर राजनीतिक चर्चा
जयपुर। प्रदेश कांग्रेस में अब तक एससी-एसटी या अल्पसंख्यक वर्ग को कभी प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी नहीं मिली। इस पद पर अब तक सबसे अधिक 31 साल तक ब्राह्मण अध्यक्ष रहे हैं। 27 साल से अधिक समय तक जाटों का दबदबा रहा है। माली सात साल और गुर्जर अध्यक्ष छह साल रहे। राजपूत, कायस्थ, माली, कुमावत, जैन, गुर्जर समेत विभिन्न सामाजिक वर्गों के नेताओं को भी मौका मिला। तर्क है कि प्रदेशाध्यक्ष का चयन जाति आधार पर नहीं, संगठन क्षमता, गुटीय संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और आगामी चुनाव में जीत की क्षमता को ध्यान में रखकर होगा। लेकिन हाल ही जिला अध्यक्षों की नियुक्ति में भी जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को प्रमुख आधार बनाया गया था।
प्रदेशाध्यक्ष जातिगत दबदबा
ब्राह्मण: नौ नेताओं ने 31 साल दो महीने 14 दिन(गोकुलभाई भट्ट, जयनारायण व्यास, हरिदेव जोशी, रामकिशोर व्यास, गिरधारीलाल व्यास, नवलकिशोर शर्मा, गिरिजा व्यास, बीडी कल्ला और सीपी जोशी)
जाट: आठ जाट नेता 27 साल तीन महीने 13 दिन रहे(मा. आदित्येन्द्र, सरदार हरलाल सिंह, नाथूराम मिर्धा, रामनारायण चौधरी, परसराम मदेरणा, नारायण सिंह, डॉ.चन्द्रभान, गोविन्द सिंह डोटासरा)
कायस्थ: एक साल 11 महीने 11 दिन (माणिक्यलाल वर्मा, मथुरादास माथुर)
माली: अशोक गहलोत दो कार्यकाल में सात साल 34 दिन
कुमावत: शोभाराम एक साल
जैन : हीरालाल देवपुरा पांच महीने 29 दिन
राजपूत समाज: लक्ष्मी कुमारी चूंडावत छह महीने 27 दिन
गुर्जर: सचिन पायलट छह साल पांच महीने 24 दिन
अब तक सबसे लंबे समय रहे अध्यक्ष
पूर्व सीएम अशोक गहलोत दो अलग अलग कार्यकाल में सात साल 34 दिन अध्यक्ष रहे। कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट छह साल 5 माह 24 दिन, परसराम मदेरणा 5 साल, 11 माह 17 दिन, डॉ.गिरिजा व्यास 4 साल 9 माह एक दिन के अध्यक्ष बने। वहीं, महिला प्रदेशाध्यक्ष में लक्ष्मी कुमारी चूंडावत और डॉ.गिरिजा व्यास हैं। पार्टी की विचारधारा के हिसाब से एससी, एसटी वर्ग कांग्रेस से लंबे समय से जुड़ाव रखता है। सभी संतुलनों को ध्यान में रखते हुए पार्टी में किसी एससी, एसटी या अल्पसंख्यक को पीसीसी चीफ पद पर मौका मिलता है तो खुशी की बात होगी।
डॉ.चन्द्रभान, पूर्व पीसीसी चीफ
पी सीसी चीफ पद के लिए एससी एसटी वर्ग के लोगों को मौका भी मिलना चाहिए। लंबे समय से मौका नहीं मिलने पर इस वर्ग के लोगों से पार्टी को राय मशविरा करना चाहिए। यह वर्ग शुरू से ही कांग्रेस के साथ जुड़ाव रखता है।
गोविन्दराम मेघवाल, पूर्व विधायक
कि सी भी पार्टी में उसके मजबूत वोट बैंक वाले वर्ग को उच्च स्तर पर प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, लेकिन यह तय कर लेना चाहिए कि वो पार्टी की विचारधारा के प्रति दृढ रहेगा। सीपीएम को छोड़कर आजकल दल बदल के खेल में अधिकांश पार्टियों में अपने ही नेताओं पर आशंका छाई रहती है। प्रदेश में उन जातियों के प्रभाव, सामजिक, राजनीतिक संतुलन को देखते हुए फैसला होना चाहिए। अधिकांश दलों में हाईकमान स्तर पर मजबूत नेताओं को ही मौका देने की परंपरा बनी हुई है। एससी एसटी वर्ग के नेताओं को भाजपा-कांग्रेस मौका देते हैं, लेकिन संतुलन बनाए रखने की कवायद हाईकमान स्तर पर ही होती है।

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