नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क फिर विवादों में: शेरनी 'तारा' के शावक की मौत, लापरवाही और अधिकारियों के बीच गुटबाजी को लेकर उठे सवाल
शेरनी के शावक की मौत
जयपुर। जयपुर का नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। इस बार मामला शेरनी 'तारा' के एक शावक की मौत से जुड़ा है। घटना के बाद पार्क में लापरवाही और अधिकारियों के बीच कथित गुटबाजी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि प्रशासनिक विवादों का असर कहीं न कहीं वन्यजीवों की सुरक्षा और देखभाल पर पड़ रहा है।
- 29 जून को दिया था दो शावकों को जन्म
जानकारी के अनुसार, शेरनी तारा ने 29 जून को लॉयन सफारी क्षेत्र में दो शावकों को जन्म दिया था। इनमें से एक शावक की मौत हो गई, जबकि दूसरा शावक फिलहाल अपनी मां के साथ स्वस्थ बताया जा रहा है। शावक की मौत के बाद पूरे मामले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है।
- ACF ने लगाए गंभीर आरोप
नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के सहायक वन संरक्षक ACF देवेंद्र राठौड़ ने उप वन संरक्षक (DCF) को पत्र लिखकर पशु चिकित्सक डॉ. अरविंद माथुर पर आरोप लगाए हैं। पत्र में कहा गया है कि शेरनी तारा के गर्भधारण और प्रसव की सूचना समय पर कार्यालय को नहीं दी गई, जिसके कारण उसके आहार, उपचार और आवश्यक प्रबंधन में बाधा आई। साथ ही सफारी क्षेत्र में प्रसव होने से शेरनी और उसके शावकों की सुरक्षा भी प्रभावित होने की बात कही गई है।
- अधिकारियों को दी गई थी सूचना
वहीं दूसरी ओर ये बात सामने आ रही है कि पूरे घटनाक्रम की जानकारी समय पर मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक (CWLW) अरुण के. प्रसाद और DCF को दे दी गई थी। यह भी कहा जा रहा है कि मृत शावक का पोस्टमार्टम विधिवत गठित बोर्ड से कराया गया और सभी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया गया। अधिकारियों के अनुसार दूसरे शावक की स्थिति सामान्य और स्वस्थ है।
- जिम्मेदारी किसकी
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बायोलॉजिकल पार्क में वन्यजीवों की निगरानी, स्वास्थ्य परीक्षण और सूचना तंत्र की अंतिम जिम्मेदारी किसकी है। यदि सभी प्रक्रियाओं का पालन हुआ तो फिर विवाद क्यों खड़ा हुआ, और यदि लापरवाही हुई तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी।
- क्या पार्क में गुटबाजी हावी हो गई है
इस पूरे घटनाक्रम ने पार्क के भीतर कथित गुटबाजी की चर्चाओं को भी हवा दे दी है। कुछ समय पहले ही मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अरुण के. प्रसाद ने ACF देवेंद्र राठौड़ को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नोटिस में वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ तथ्यों के बिना आरोप लगाने और सेवा आचरण के विपरीत व्यवहार का उल्लेख किया गया था।
- पहले भी विवादों में रहा पार्क
नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क इससे पहले भी आग लगने की घटनाओं, सफारी के दौरान पर्यटकों की गाड़ियां फंसने और अन्य प्रशासनिक मामलों को लेकर चर्चा में रहा है। अब शावक की मौत के बाद फिर यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या आंतरिक विवादों और प्रशासनिक खींचतान का असर वन्यजीवों के संरक्षण पर पड़ रहा है।
- तबादलों से पहले बड़े बदलाव की चर्चा
वन विभाग में तबादलों के संभावित दौर के बीच यह भी चर्चा है कि नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव हो सकते हैं।

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