आरयूएचएस में दुर्लभ सर्जरी पिता-पुत्र की आंखों की रोशनी बचाई, जन्मजात प्टोसिस का सफल इलाज
जन्मजात प्टोसिस से पीड़ित पिता-पुत्र की दुर्लभ सर्जरी
जयपुर। राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (आरयूएचएस) के नेत्र रोग विभाग ने एक दुर्लभ उपलब्धि हासिल करते हुए जन्मजात प्टोसिस (Ptosis) से पीड़ित पिता और पुत्र की सफल सर्जरी कर उनकी दृष्टि सुरक्षित रखने में सफलता प्राप्त की है। करौली निवासी 29 वर्षीय नारायण अपने आठ वर्षीय बेटे के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे थे। जांच के दौरान चिकित्सकों ने पाया कि बेटे के साथ-साथ पिता भी उसी जन्मजात बीमारी से ग्रस्त हैं, जिसमें ऊपरी पलक असामान्य रूप से झुक जाने से देखने में परेशानी होती है। विस्तृत जांच और काउंसलिंग के बाद विशेषज्ञों ने दोनों की एक साथ सर्जरी करने का निर्णय लिया।
नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. नीशा दुलानी के निर्देशन में डॉ. माया हाड़ा और एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. वरुण व डॉ. साधना की टीम ने आधुनिक तकनीक से सफल ऑपरेशन किया। सर्जरी के बाद दोनों मरीज स्वस्थ हैं और उनकी दृष्टि में सुधार हुआ है। डॉ. माया हाड़ा ने बताया कि बच्चों में प्टोसिस का समय पर इलाज नहीं होने पर आंख का विकास प्रभावित हो सकता है और आलसी आंख (एम्ब्लायोपिया) जैसी स्थायी समस्या का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए ऐसे मामलों में शीघ्र सर्जरी आवश्यक है। आरयूएचएस के प्रिंसिपल डॉ. मोहनीश ग्रोवर ने बताया कि बेहतर सुविधाओं और विशेषज्ञ उपचार के कारण पिछले एक महीने में नेत्र रोग विभाग की ओपीडी और आईपीडी में करीब 20 प्रतिशत मरीजों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

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