प्राचीन श्री लक्ष्मी जगदीश मंदिर तक पहुंचना हुआ श्रद्धालुओं के लिए कष्टदायक : मांस की दुकानों, गंदगी और अतिक्रमण से आस्था पर पड़ रही है चोट
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में रोष
जिले के गोनेर कस्बे में स्थित प्राचीन एवं प्रसिद्ध श्री लक्ष्मी जगदीश मंदिर तक पहुंचना आज श्रद्धालुओं के लिए एक कठिन और पीड़ादायक अनुभव बनता जा रहा है।
जयपुर। जिले के गोनेर कस्बे में स्थित प्राचीन एवं प्रसिद्ध श्री लक्ष्मी जगदीश मंदिर तक पहुंचना आज श्रद्धालुओं के लिए एक कठिन और पीड़ादायक अनुभव बनता जा रहा है। करीब 500 साल पुराने इस मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को मुख्य मार्गों पर मांस की दुकानों के सामने पड़ी हड्डियों और मांस के टुकड़ों के ऊपर से गुजरना पड़ता है। इसके साथ ही, मंदिर की ओर जाने वाले रास्तों पर अतिक्रमण के कारण खासतौर से एकादशी और रविवार जैसे पावन दिनों में वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे श्रद्धालुओं को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। टोंक रोड की ओर से भूडाला बस स्टेण्ड से आने वाले मंदिर के मुख्य मार्ग पर स्थित मांस की दुकानों के बाहर खुले में पड़े मांस के टुकड़े, खून और हड्डियां श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत कर रहे हैं। श्रद्धालुओं ने कहा कि मंदिर दर्शन के लिए जाते गंदगी और मांस अवशेषों के ऊपर से गुजरना पड़ता है, तो उनकी श्रद्धा को ठेस पहुंचती है।
एकादशी और रविवार को हालात और बिगड़ते हैं :
श्री लक्ष्मी जगदीश मंदिर में एकादशी, रविवार, पूर्णिमा और विशेष पर्वों पर श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। इन दिनों मंदिर की ओर जाने वाले मुख्य रास्तों पर अस्थायी ठेले, दुकानों और अवैध पार्किंग के कारण अतिक्रमण हो जाता है। कई बार श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने में आधे घंटे से एक घंटे तक का समय लग जाता है। एंबुलेंस और आपातकालीन वाहनों के लिए रास्ता बनाना भी मुश्किल हो जाता है, जो किसी बड़े हादसे की आशंका को जन्म देता है।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में रोष :
इस स्थिति को लेकर स्थानीय नागरिकों और मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं में गहरा रोष है। लोगों का कहना है कि दस साल पहले जेडीए ने गढ़ के सामने वाले रास्ते को 80 फीट, पुजारी मौहल्ला, मुख्य बाजार, साख रोड और बाड़ा पदमपुरा रोड को 40 फीट चौड़ा किया था, मगर दुकानदारों ने वापस अतिक्रमण कर लिया। यहां के बाशिन्दें और श्रद्धालु लंबे समय से जयपुर विकास प्राधिकरण, जिला प्रशासन और नगर निगम को इस समस्या से अवगत कराते आ रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया है। श्रद्धालुओं और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि मंदिर के आसपास मांस की दुकानों को अन्यत्र स्थानांतरित किया जाए या कम से कम उन्हें ढंके हुए और स्वच्छ तरीके से संचालित करने के निर्देश दिए जाएं।

Comment List