दिल्ली प्रदर्शन में छाईं रितु बराला, राहुल की शाबाशी के बाद बदली प्रदेश की राजनीति की रुत
राहुल गांधी की पसंद का बरसों पुराना रहा है नाता
जयपुर। दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ली गई राजस्थान की एनएसयूआई नेता रितु बराला पुलिस से कथित मारपीट के वीडियो के बाद चर्चा में हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की शाबाशी और कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के समर्थन ने रितु को प्रदेश की सियासत में सुर्खियों में ला दिया है। बराला के दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस से टकराव और इसके बाद राहुल गांधी की ओर से उन्हें शेरनी कहकर सराहे जाने ने राजस्थान कांग्रेस में युवा नेतृत्व, आक्रामक छात्र राजनीति और राहुल गांधी की पंसद के उभरते राजस्थानी चेहरों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। झुंझुनूं निवासी रितु बराला एनएसयूआई की पूर्व राष्टÑीय सचिव रह चुकी हैं और राजस्थान विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में सक्रिय रही हैं। दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान बस में महिला पुलिसकर्मी के साथ उनकी हाथापाई का करीब दो मिनट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने घटना की निंदा करते हुए महिला कार्यकर्ताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार पर सवाल उठाए और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
राहुल गांधी की पसंद का बरसों पुराना रहा है नाता :
एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव रितु पार्टी में अब उन चेहरों की राजनीतिक ताकत और भविष्य की भूमिका पर नजर है। झुंझुनूं की रहने वाली रितु बराला महारानी कॉलेज, जयपुर की पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष और अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो खिलाड़ी रही हैं। एनएसयूआई के राष्ट्रीय सचिव पद तक पहुंचीं रितु अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में हैं।
विनोद जाखड़ से अभिषेक चौधरी तक नजर: एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ भी राजस्थान से आने वाला प्रमुख युवा चेहरा हैं। रितु के साथ प्रदर्शन के घटनाक्रम में उनका नाम चर्चा में रहा। अनिल चोपड़ा और मुकुल खींचड़ जैसे नाम भी इस समीकरण का हिस्सा हैं। विधायी राजनीति में मुकेश भाकर और अभिमन्यु पूनिया छात्र एवं युवा संगठनों से आगे बढ़े नेताओं के उदाहरण हैं। सचिन पायलट भी युवा राजनीति से राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचे हैं। इन चेहरों की राजनीतिक स्थितियां अलग अलग हैं, लेकिन युवाओं के बीच पकड़ कांग्रेस के लिए अहम है।

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