डेढ़ हजार किमी सड़कें और 31 टोल प्लाजा के नए मालिक की तलाश, अब बिकने की तैयारी में रिडकोर
सरकार भी बेच सकती है अपना हिस्सा
जयपुर। राजस्थान में 1,449 किलोमीटर लंबी सड़कों और 31 टोल प्लाजा के संचालन करने वाली कंपनी रिडकोर का मालिक बदल सकता है। कंपनी की 50 से लेकर 100 फीसदी तक हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सरकार ने संभावित खरीदारों से रुचि पत्र मांगे हैं। फिलहाल आईएलएंडएफएस समूह अपनी 50 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रहा है। राजस्थान सरकार भी अपना हिस्सा बेचने का फैसला करती है तो पूरी कंपनी नए निवेशक के हाथों में जा सकती है। यह सौदा सिर्फ कंपनी के मालिकाना हक का मामला नहीं है। इन सड़कों से गुजरने वाले वाहन चालकों के लिए सड़क की हालत, मरम्मत और टोल व्यवस्था भी इससे जुड़ी है। हालांकि, हिस्सेदारी बिक्री के दस्तावेज में टोल दरें बढ़ाने या घटाने का कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है।
13 सड़क मार्गों का संचालन, 31 टोल प्लाजा :
रिडकोर की स्थापना 2004 में राजस्थान सरकार और इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (आईएलएंडएफएस) ने बराबर की हिस्सेदारी के साथ की थी। कंपनी प्रदेश में 13 सड़क मार्गों का संचालन करती है। इनमें फलोदी-रामजी की गोल, हनुमानगढ़-किशनगढ़, लालसोट-कोटा, अलवर-भिवाड़ी और झालावाड़-उज्जैन जैसे मार्ग शामिल हैं। इनकी कुल लंबाई करीब 1,449 किलोमीटर है। अब आईएलएंडएफएस समूह अपनी 50 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया में है। सरकार की हिस्सेदारी की बिक्री का फैसला अलग से होगा।
नया निवेशक आया तो क्या बदलेगा :
निजी निवेशक के आने से सड़क रख-रखाव और टोल संचालन में सुधार की संभावना बन सकती है। निवेश बढ़ा तो खराब सड़कों की मरम्मत, नियमित देखरेख और टोल प्लाजा की सुविधाओं में सुधार हो सकता है, लेकिन यह अपने आप नहीं होगा। असली फर्क इस बात से पड़ेगा कि नए मालिक की जिम्मेदारियां क्या तय होती हैं और सरकार उन पर कितनी निगरानी रखती है। आम वाहन चालकों के लिए सबसे बड़ा सवाल टोल दरों और सड़क की गुणवत्ता का है।

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