चांद पर भारतीयों को उतारने की तैयारी तेज! इसरो विकसित कर रहा 2400 किलो न्यूटन क्षमता वाला इंजन
3डी प्रिंटिंग तकनीक से 70 प्रतिशत कलपुर्जों का निर्माण
चेन्नई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) भविष्य के प्रक्षेपण यानों के लिए एलओएक्स-मीथेन इंजन (एलएमई 100) विकसित कर रहा है। इसरो ने इसे अपने अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण यान (एनजीएलवी) और वर्ष 2040 के लिए लक्षित भारत के मानवयुक्त चंद्रमा पर उतरने के मिशन में आवश्यक भविष्य के भारी प्रक्षेपण यान के लिए प्रमुख प्रणोदन प्रणाली के रूप में चुना है। एकीकृत एलएमई1100 इंजन अगले वर्ष के मध्य तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद निर्धारित संचालन परिस्थितियों के अनुरूप इसकी क्षमता प्रमाणित करने के लिए कई चरणों में तप्त परीक्षण किए जाएंगे। इन परीक्षणों में अलग-अलग प्रणोदन स्तरों पर इंजन के संचालन की क्षमता भी जांची जाएगी। इसी दौरान, पूर्ण प्रवाह चरणबद्ध दहन चक्र (एफएफएससीसी) पर आधारित 2400 किलो न्यूटन क्षमता वाले एलओएक्स-मीथेन इंजन के विकास की डिजाइन संबंधी गतिविधियां भी पूरी कर ली गई हैं। इसरो ने बताया कि यह इंजन मानवयुक्त चंद्रमा लैंडिंग मिशनों के लिए भविष्य में भारी प्रक्षेपण यान विकसित करने में सक्षम बनाएगा।
दुनिया भर में तरल प्रणोदन प्रणालियों में एलओएक्स-मीथेन इंजनों की ओर रुझान बढ़ रहा है। इसके प्रमुख कारणों में स्वच्छ दहन, कम रखरखाव की आवश्यकता और पुनः उपयोग की उपयोगिता शामिल हैं। इसके अलावा, मंगल ग्रह पर कार्बन डाइऑक्साइड और पानी की बर्फ से मीथेन तैयार करने की संभावना भी है, जो भविष्य के मंगल मिशनों और वहां मानव बस्तियां बसाने के लिए उपयोगी हो सकती है।
भविष्य के प्रक्षेपण यानों में एलओएक्स-मीथेन प्रणोदन प्रणाली की संभावनाओं को देखते हुए इसरो ने वर्ष 2019 में इस क्षेत्र में विकास कार्य शुरू किया था। इसका उद्देश्य तरल ऑक्सीजन और तरल मीथेन (एलओएक्स-मीथेन) के संयोजन का इंजन के संचालन पर पड़ने वाले प्रभाव और इससे जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को समझना था। वर्ष 2019-2020 के दौरान मौजूदा सीई-20 एलओएक्स/तरल हाइड्रोजन क्रायोजेनिक इंजन के उप-तंत्रों का उपयोग करके 20 टन प्रणोदन क्षमता वाला प्रौद्योगिकी प्रदर्शक इंजन विकसित किया गया और उसका परीक्षण किया गया। इसे एलएम20-टीडी इंजन नाम दिया गया।
इस प्रदर्शक इंजन को विकसित करने के लिए सीई-20 इंजन की प्रणोदक प्रवाह नियंत्रण प्रणाली और इंजन चालू करने की प्रणाली में आवश्यक बदलाव किए गए। यह इंजन गैस जनरेटर चक्र पर काम करता था। इसके प्रमुख उप-तंत्रों में थ्रस्ट चैंबर, ईंधन-समृद्ध गैस जनरेटर, ईंधन टर्बोपंप, एलओएक्स टर्बोपंप, प्रज्वलक, स्टार्ट-अप प्रणाली, नियंत्रण उपकरण, प्रवाह नियंत्रण उपकरण और विद्युत चालित मिश्रण अनुपात नियंत्रण वाल्व शामिल थे। विकास परीक्षणों से पहले सैद्धांतिक विश्लेषण के माध्यम से सभी उप-तंत्रों की डिजाइन की उपयुक्तता का आकलन किया गया। परीक्षणों का क्रम निर्धारित करने के लिए इसरो में विकसित गणितीय मॉडल का उपयोग किया गया। एलएम20 प्रदर्शक इंजन के परीक्षण के लिए इसरो के प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (आईपीआरसी) में मौजूदा क्रायोजेनिक इंजन परीक्षण केंद्र को उन्नत किया गया। इसके बाद एक शीत प्रवाह परीक्षण और पांच गर्म परीक्षण सफलतापूर्वक किए गए। इन परीक्षणों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर एलओएक्स-मीथेन इंजन के लिए शीतलन प्रक्रिया, थ्रस्ट चैंबर और गैस जनरेटर में प्रज्वलन, इंजन चालू करने, दहन तथा रोटर की गतिशील प्रणाली के प्रदर्शन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुईं।प्रौद्योगिकी प्रदर्शक इंजन से मिली इन जानकारियों का उपयोग इसरो में विकसित किए जा रहे एलओएक्स-मीथेन इंजन की डिजाइन में किया गया है।
इसरो ने वर्ष 2023 में इसरो ने 1100 किलो न्यूटन क्षमता वाले एलओएक्स-मीथेन इंजन (एलएमई1100) की प्रमुख प्रौद्योगिकियों के विकास का औपचारिक रूप से काम शुरू किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य इंजन के विभिन्न उप-तंत्रों के लिए आवश्यक प्रौद्योगिकियों का विकास और उनका सत्यापन करना था। इनमें टर्बोपंप, प्रज्वलक, गैस जनरेटर और थ्रस्ट चैंबर शामिल हैं। एलएमई1100 इंजन को गैस जनरेटर चक्र (जीजीसी) पर आधारित बनाया जा रहा है। इसकी डिजाइन में उद्योगों की भागीदारी को आसान बनाने और लागत कम रखने पर विशेष ध्यान दिया गया है। देशभर के औद्योगिक भागीदारों की सक्रिय भागीदारी से इंजन के 70 प्रतिशत से अधिक कलपुर्जे (एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग) यानी परत-दर-परत निर्माण तकनीक से तैयार किए गए हैं। गैस जनरेटर का निर्माण भी इसी तकनीक से किया गया है और आईपीआरसी में उसके प्रमाणन परीक्षण चल रहे हैं। इसके छोटे आकार वाले संस्करण का प्रयोगशाला स्तर पर व्यापक परीक्षण किया गया। इन परीक्षणों के जरिए स्पार्क टॉर्च प्रज्वलक से इंजन चालू करने के क्रम का निर्धारण किया गया और प्रज्वलन के दौरान एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग से तैयार इंजेक्टर के विभिन्न हिस्सों की कार्यक्षमता का आकलन किया गया।
पूर्ण आकार के गैस जनरेटर का पहला प्रज्वलन परीक्षण नौ अक्टूबर 2026 को सफलतापूर्वक किया गया। अलग-अलग परिस्थितियों में इसके प्रदर्शन का आकलन करने के लिए इसी तरह के कई और परीक्षण किए जाने की योजना है। थ्रस्ट चैंबर के छोटे आकार वाले संस्करण का गर्म परीक्षण अभियान भी पूरा किया गया। इसके माध्यम से उन नई निर्माण तकनीकों का प्रदर्शन किया गया, जिन्हें आगे चलकर पूर्ण आकार के थ्रस्ट चैंबर में अपनाने की योजना है।
इन परीक्षणों में एलएमई1100 थ्रस्ट चैंबर के लिए डिजाइन किए गए इंजेक्टरों की वास्तविक संचालन परिस्थितियों में जांच की गई। इसके लिए डिजाइन और संचालन संबंधी विभिन्न मानकों में बदलाव करके उनके प्रदर्शन का आकलन किया गया। आईपीआरसी में किए गए गर्म परीक्षणों से इंजेक्टर की सबसे उपयुक्त संरचना को अंतिम रूप देने में मदद मिली। साथ ही, ऑक्सीकारक-समृद्ध और ईंधन-समृद्ध स्पार्क टॉर्च प्रज्वलकों की कार्यप्रणाली का भी प्रदर्शन किया गया।

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