Voice of Youth: साइबर ठगों की पहचान होगी आसान, लेकिन ठगी के नए रास्ते निकाल लेंगे शातिर अपराधी!
कॉल पर पहचान उजागर होने से ठगों में बढ़ेगा डर, फिर भी सतर्कता जरूरी
कोटा । साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच सरकार की ओर से फर्जी कॉल करने वालों और साइबर ठगों की पहचान आसान बनाने के लिए शुरू की जा रही कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन की पहल उम्मीद तो जगाती है, लेकिन क्या इससे ऑनलाइन ठगी का खेल पूरी तरह बंद हो जाएगा? इस सवाल पर युवाओं की राय साफ है तकनीक अपराधियों तक पहुंचने का रास्ता आसान बना सकती है, पुलिस की जांच में लगने वाला समय बचा सकती है और ठगों के मन में पकड़े जाने का डर भी पैदा कर सकती है, लेकिन साइबर अपराध पर पूरी तरह लगाम लगाना इतना आसान नहीं है।
नहीं रुकेगी साइबर ठगी, बदल सकते हैं तरीके
सरकार की पहल अच्छी है, लेकिन जिस व्यक्ति को साइबर अपराध करना है, वह ठगी के नए तरीके तलाश सकता है। केवल कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन से साइबर अपराध पूरी तरह खत्म नहीं होंगे। हालांकि, इससे अपराधियों की पहचान करने और उन्हें जल्द पकड़ने में पुलिस को मदद मिल सकती है। ठगों पर कार्रवाई तेज होने से व्यवस्था का असर जरूर दिखाई देगा।
-रितिका महावर, कॉलेज स्टूडेंट
50 प्रतिशत तक घट सकते हैं अपराध
यदि मोबाइल पर कॉल करने वाले की पहचान आसानी से सामने आने लगे और अंतरराष्ट्रीय कॉल की भी पहचान हो सके, तो साइबर अपराध के मामलों में काफी कमी आ सकती है। संभव है कि इससे अपराधों में 50 प्रतिशत तक कमी आए, लेकिन साइबर ठगी पूरी तरह समाप्त हो जाएगी, ऐसा मानना सही नहीं होगा। इस पहल से उन अपराधियों की पहचान भी आसान हो सकती है, जिन तक पहुंचना अब तक मुश्किल रहा है।
-रिया कुमारी, कॉलेज स्टूडेंट
पुलिस का समय बचेगा, अपराधियों में बढ़ेगा डर
सरकार की इस पहल से पुलिस का काफी समय बच सकता है। साइबर ठगी और फर्जी कॉल करने वालों की पहचान जल्दी होने से जांच में मदद मिलेगी। पकड़े जाने के डर से कुछ अपराधी ठगी करना छोड़ भी सकते हैं, जबकि कुछ अपने तरीके बदलने की कोशिश कर सकते हैं। इस व्यवस्था की असली उपयोगिता एक नवंबर के बाद ही पता चलेगी, जब यह सामने आएगा कि आमजन को इससे कितना फायदा मिल रहा है।
-अखिल जैन, कॉलेज स्टूडेंट
अपराधियों की पहचान होगी आसान, लेकिन सतर्कता जरूरी
सरकार की यह अच्छी योजना है। इससे साइबर सेल को अपराधियों तक पहुंचने और उनकी पहचान करने में आसानी हो सकती है। पुलिस को जांच में पहले की तुलना में कम मेहनत करनी पड़ेगी, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि साइबर अपराध पूरी तरह बंद हो जाएंगे। आमजन को भी जागरूक रहना होगा। किसी अनजान व्यक्ति के फोन करने पर उसकी बातों में नहीं आएं और किसी भी स्थिति में ओटीपी साझा न करें। सावधानी और जागरूकता ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे मजबूत आधार है।
-कार्तिक मीणा, कॉलेज स्टूडेंट

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