Voice of Youth: त्योहार ऐसा हो, जिसमें रोशनी सबके हिस्से आए
पटाखों के शोर से बचाएं बेजुबान, खुशियां बांटकर मनाएं त्योहार
कोटा । दीपावली दीपों का पर्व है, खुशियों को बांटने का त्योहार है लेकिन क्या हमारी खुशियां किसी बेजुबान के डर, किसी परिवार की चिंता और पर्यावरण की कीमत पर मनाई जानी चाहिए? आसमान को रोशनी से भरने की होड़ में पटाखों का शोर पशु-पक्षियों को सहमा देता है, धुआं हवा को प्रदूषित करता है और जरा-सी लापरवाही आगजनी की वजह बन सकती है। ऐसे में दीपावली का असली संदेश तेज धमाकों में नहीं, बल्कि प्रेम, संवेदना और जिम्मेदारी के उजाले में छिपा है। इस दीपावली जरूरतमंदों के चेहरों पर मुस्कान लाएं, पशु-पक्षियों की सुरक्षा का ध्यान रखें और पर्यावरण को बचाने में अपनी भूमिका निभाएं। युवाओं का संदेश साफ है त्योहार ऐसा हो, जिसमें रोशनी सबके हिस्से आए और किसी की खुशी किसी की परेशानी न बने।
पटाखों के शोर में न भूलें बेजुबानों का दर्द
दीपावली पर कम से कम पटाखे फोड़ने चाहिए। तेज आवाज से पशु-पक्षी डर जाते हैं और उन्हें काफी परेशानी होती है। अपनी खुशी के लिए बेजुबानों को परेशान करना उचित नहीं है। यदि पटाखे चलाने ही हैं, तो कम आवाज वाले विकल्प चुनें। हालांकि, सबसे अच्छा विकल्प यही है कि पर्यावरण और पशु-पक्षियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। आमजन को भी इस दिशा में जागरूक होना चाहिए।
-भारती कुशवाहा, कॉलेज स्टूडेंट
पटाखों से नहीं, खुशियां बांटकर रोशन करें दीपावली
दीपावली खुशियों का पर्व है, इसलिए इसे अपनों के साथ मिलकर मनाना चाहिए। लक्ष्मी माता की पूजा-अर्चना करें, नए कपड़े पहनें और मिठाइयां बांटकर खुशियां साझा करें। जरूरतमंदों को मिठाई खिलाने और उनकी मदद करने से त्योहार की खुशी और बढ़ जाती है। पटाखों का कम इस्तेमाल करें और तेज आवाज वाले पटाखों से बचें। सबसे अच्छा यह है कि ईको फ्रेडली पटाखे फोड़ने चाहिए, जिससे प्रदूषण भी नहीं फैलता है।
-खुशबू मेघवाल, कॉलेज स्टूडेंट
ईको-फ्रेंडली विकल्प अपनाएं, सुरक्षा को न करें नजरअंदाज
पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझना जरूरी है। पटाखों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण बढ़ाता है, वहीं लापरवाही से आगजनी जैसी घटनाएं भी हो सकती हैं। इसलिए पटाखों का इस्तेमाल सीमित करना चाहिए और सुरक्षित विकल्पों को प्राथमिकता देनी चाहिए। दीपावली पर एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर, जरूरतमंदों की मदद करके और अपनों के साथ समय बिताकर भी खुशियां मनाई जा सकती हैं। त्योहार का आनंद तभी सार्थक है, जब हमारी वजह से किसी को नुकसान न पहुंचे।
-राहुल कुशवाहा, कॉलेज स्टूडेंट
प्रदूषण पर बहस के साथ अपनी जिम्मेदारी भी समझें
पटाखे फोड़ने से प्रदूषण होता है, लेकिन वाहनों से भी प्रदूषण फैलता है। दीपावली पर पटाखों का कितना इस्तेमाल करना है, यह लोगों की अपनी पसंद और जिम्मेदारी पर निर्भर करता है। दो या तीन दिन ही पटाखे फोड़े जाते हैं। पटाखों से ज्यादा प्रदूषण नहीं फैलता है। पटाखों से फोड़ने से खुशी मिलती है लेकिन इसे सावधानी पूर्वक फोड़ना चाहिए, जिससे दूसरों को परेशानी नहीं हो पाए।
-आदित्य आचार्य, युवा

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