राष्ट्रीय लोक कला महोत्सव 'लोकरंग' : ताल, थाप और घुंघरू, 11 दिन एक मंच पर बसेगा पूरा हिंदुस्तान
जवाहर कला केन्द्र में राष्ट्रीय लोक कला महोत्सव
जयपुर। जब रेगिस्तान की गैर पंजाब के भांगड़े से सुर मिलाएगी और मणिपुर की थांग-ता का जोश गुजरात के गरबे से टकराएगा, तब मुक्ताकाशी मंच पर पूरा देश एक साथ थिरकता दिखेगा। गुलाबी नगरी में 27 अक्टूबर से 6 नवंबर तक जवाहर कला केन्द्र में राष्ट्रीय लोक कला महोत्सव 'लोकरंग' की धूम रहेगी। यह इसका 29वां संस्करण है, और तैयारियां अंतिम चरण में हैं। करीब 22 राज्यों के लोक कलाकार 11 दिन तक अपनी जड़ों की रंगत बिखेरेंगे।
राजस्थान से चांग, गैर, तेरहताली और चकरी की प्रस्तुतियां होंगी। पंजाब से लुड्डी, सम्मी और भांगड़ा आएंगे। हिमाचल की किन्नौरी नाटी, उत्तराखंड का छपेली और कश्मीर का रऊफ पहाड़ों की मिठास घोलेंगे। झारखंड का पुरुलिया छऊ, मणिपुर का लाई हाराओबा, असम का बिहू, ओडिशा का संबलपुरी, बिहार का झूमर और मध्य प्रदेश का राई नृत्य अपने-अपने अंचल की कहानी सुनाएंगे। महाराष्ट्र की लावणी और सोंगी मुखौटा, गुजरात का तलवार रास, केरवा नो वेश और गरबा, तथा गोवा की कलशी फुगड़ी पश्चिम भारत के रंग भरेंगी।

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