बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व विजयादशमी 20 को, नई शुरुआत के लिए शुभ अवसर
अपराजिता, शमी, शस्त्र और आयुध पूजन किया जाएगा
जयपुर। आश्विन शुक्ल दशमी को मनाया जाने वाला विजयादशमी 20 अक्टूबर को विभिन्न योग में मनाया जाएगा। इस दिन अपराजिता, शमी, शस्त्र और आयुध पूजन किया जाएगा। ज्योतिषाचार्य डॉ. महेन्द्र मिश्रा ने बताया कि विजयादशमी पर गुरु के कर्क राशि में उच्च स्थिति में रहेंगे। साथ ही श्रवण नक्षत्र का संयोग रहेगा। इस दिन शुभ विजय मुहूर्त रहेगा। इसे परंपरागत रूप से शुभ कार्यों के आरंभ के लिए उपयुक्त माना जाता है। मान्यता है कि इस समय नए कार्य, शिक्षा, व्यवसाय, यात्रा अथवा किसी महत्वपूर्ण लक्ष्य की शुरुआत के लिए संकल्प लिया जा सकता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में मंगल को साहस, पराक्रम और संकल्प शक्ति का कारक माना जाता है।
वहीं, गुरु को ज्ञान, धर्म, न्याय और सद्बुद्धि का प्रतीक माना है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार गुरु 31 अक्टूबर तक कर्क राशि में रहेंगे, जहां उन्हें उच्च का माना जाता है। श्रवण नक्षत्र के देवता भगवान विष्णु माने गए हैं और इसका संबंध ज्ञान, श्रवण तथा सीखने से जोड़ा जाता है। विजयादशमी पर अपराजिता देवी की पूजा करने की परंपरा है। अपराजिता का अर्थ है-जिसे पराजित न किया जा सके। धार्मिक मान्यता के अनुसार अपराह्न काल में अपराजिता पूजन करना शुभ माना जाता है। पूजा में पुष्प, अक्षत, कुमकुम, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। शमी वृक्ष की पूजा विजयादशमी के प्रमुख अनुष्ठानों में शामिल है। महाभारत की परंपरा के अनुसार पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान अपने शस्त्र शमी वृक्ष में छिपाए थे और समय पूरा होने पर उन्हें वापस प्राप्त किया था।

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