Voice Of Gen - Z & Alpha: 3 साल की डिग्री में लग रहे चार साल, सेमेस्टर सिस्टम बना बोझिल
बैक के चक्कर में अटक रही छात्रवृति, बैक परीक्षा की हो विशेष व्यवस्था
कोटा। तीन साल में पूरी होने वाली स्नातक की डिग्री के लिए चार साल तक इंतजार, एक बैक क्लियर करने के लिए अगले सेमेस्टर तक की मजबूरी और हर सेमेस्टर एग्जाम में अतिरिक्त फीस का बोझ। उच्च शिक्षा में लागू सेमेस्टर सिस्टम विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई आसान करने के बजाय परेशानी का सबब बनता जा रहा है। परीक्षा और परिणाम में देरी, अंकसूची में त्रुटियां, इंटरनल व प्रायोगिक अंकों का नहीं जुड़ना और छात्रवृत्ति अटकने जैसी समस्याएं विद्यार्थियों के आर्थिक दबाव के साथ मानसिक तनाव की ओर भी धकेल रही है। वॉयस ऑफ यूथ एंड अल्फा अभियान में विद्यार्थियों ने सेमेस्टर सिस्टम की खामियों को सामने रखा है।
प्रथम सेमेस्टर में बैक आने पर उसे क्लियर करने के लिए तीसरे सेमेस्टर की परीक्षा तक इंतजार करना पड़ता है। इस बीच प्रथम वर्ष की छात्रवृत्ति का आवेदन भी निरस्त हो जाता है। अंक बढ़ने की उम्मीद में रीवेल्यूएशन के लिए 300 रुपए और नंबर नहीं बढ़ने पर बैक परीक्षा के लिए फिर 300 रुपए देने पड़ते हैं। प्रत्येक सेमेस्टर की फीस 2,000 से 2,500 रुपए तक है। ऐसे में आर्थिक बोझ बढ़़ रहा।
-दिव्यांशी मुराड़िया, छात्रा राजकीय कला कन्या महाविद्यालय, रामपुरा
कॉलेज की ओर से इंटरनल अंक भेजे जाने के बावजूद दूसरे सेमेस्टर के परिणाम में अंक नहीं जुड़े, जिससे बैक आ गई। अब इसे चौथे सेमेस्टर में क्लियर करने का मौका मिलेगा। तब मुझे चौथे और सैकंड सेमेस्टर बैक के पेपर की तैयारी एक साथ करनी पड़ेगी। वहीं, प्रायोगिक परीक्षा में उपस्थित रहने के बावजूद अंकसूची में अनुपस्थित दर्ज होने की शिकायतें भी परेशानी बढ़ा रही हैं।
-अफजल खान, छात्र आर्ट्स कॉलेज
पाठ्यक्रम पूरा नहीं होना, परीक्षाओं के बीच पर्याप्त समय नहीं मिलना, इंटर्नशिप और क्रेडिट सिस्टम की जटिलताएं तथा मार्गदर्शन व संसाधनों की कमी पढ़ाई के साथ प्रतियाेगी परीक्षाओं की तैयारी, मानसिक स्थिति और भविष्य की योजनाएं भी प्रभावित होती हैं। वहीं, शिक्षा पर जीपीडी का 6% खर्च करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन आज भी शिक्षा पर सार्वजनिक व्यय 4% के स्तर तक नहीं पहुंच पाया है।
-चित्रांक्षा कंवर गौड़, छात्रा गवर्नमेंट कॉलेज कोटा
मैं तृतीय सेमेस्टर का छात्र हूं। विवि में सेमेस्टर परीक्षाओं के परिणाम समय पर जारी नहीं होने से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी प्रभावित होती है। विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को प्रत्येक सेमेस्टर का परिणाम निर्धारित समय पर जारी करना चाहिए।
-केशव मीणा, छात्र बीएससी
परीक्षा परिणामों में देरी और बैक के कारण ग्रेजुएशन की तीन साल की डिग्री पूरी होने में चार साल लग रहे हैं। परीक्षा टाइम टेबल व पुनर्मूल्यांकन में देरी, परिणाम में त्रुटियाें से समय व आर्थिक नुकसान हो रहा है। विश्वविद्यालय को बैक वाले विद्यार्थियों के लिए विशेष परीक्षा निर्धारित समय पर आयोजित करनी चाहिए ताकि विद्यार्थियों को छह महीने या एक वर्ष तक परीक्षा फॉर्म का इंतजार न करना पड़े ।
-निखिल सिंह, एमए छात्र

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