विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस : टूटने से संभलने तक की कहानी बनेगी किसी की जिंदगी का सहारा
देश में 19.73 करोड़ लोग मानसिक विकारों से प्रभावित
कोटा। केस-1 : पहले खुद को समझा बोझ, अब खुशहाल जिंदगी
नीट की तैयारी कर रहे किशोर ने परीक्षा के दबाव में नकारात्मक विचार आने पर दोस्त के साथ मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचकर मदद ली। चिकित्सक ने उसकी बात सुनी और परामर्श से भरोसा दिलाया। परिजनों के सहयोग से उसका आत्मविश्वास लौटा और वह नीट में सफल हुआ। जबकि, वह पहले खुद को परिवार पर बोझ समझता था।
केस-2 : चुप्पी तोड़ी तो पटरी पर लौटी जिंदगी
निजी क्षेत्र में काम करने वाला 34 वर्षीय युवक कार्यस्थल पर एक गलती के बाद इतना डर गया कि उसे आॅफिस जाने में ही घबराहट होने लगी। नए प्रोजेक्ट हैंडल करने से डरता था। मनोचिकित्सक डॉ. मिथलेश खींची से परामर्श और करीब दो-तीन महीने के उपचार के बाद उसकी निजी और पेशेवर जिंदगी फिर पटरी पर लौटने लगी।
व्यवहार में बदलाव पहचानें
मानसिक स्वास्थ्य केवल मानसिक बीमारी तक सीमित नहीं, बल्कि भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कल्याण से भी जुड़ा है। लगातार उदासी, बेचैनी, चिड़चिड़ापन, नींद या खानपान में बदलाव, एकाग्रता घटना, गुमसुम रहना और पसंदीदा कामों से दूरी मानसिक परेशानी के संभावित संकेत हो सकते हैं। बच्चों और किशोरों में पढ़ाई के दबाव तथा व्यवहार में लंबे समय तक बने बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है। दैनिक जीवन प्रभावित होने लगे तो विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। तनाव से जूझ रहे व्यक्ति को कई बार सलाह से ज्यादा जरूरत ऐसे व्यक्ति की होती है, जो बिना टोके और फैसला सुनाए बिना उसकी बात सुने। सामाजिक कलंक और भेदभाव के डर से लोग उपचार से बचते हैं। मानसिक बीमारी कमजोरी नहीं है। अनुभवों को सुनना और समझना स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का आधार भी बन सकता है।
-डॉ. अविनाश बंसल,वरिष्ठ चिकित्सक बालरोग विशेषज्ञ
चुप्पी तोड़ें, स्वीकार करें और समय पर इलाज कराएं
मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के लिए शुरूआती संकेत पहचानना, परेशानी स्वीकारना और शीघ्र उपचार कराना जरूरी है। तनाव, अवसाद, ओसीडी और पैनिक डिसआॅर्डर सहित कई समस्याओं में उपचार से मदद मिल सकती है। मानसिक बीमारिया अनेक प्रकार की होती है। साइकॉटिक लक्षण केवल एक दो बीमारियों में होते हैं बाकी बहुत साधारण बीमारियां जैसे तनाव, अवसाद, ओसीडी, नशे की प्रवृत्ति, यौन डिसऑर्डर्स, पैनिक डिसऑर्डर्स, कन्वर्जन डिसऑर्डर, डिसोसिएटिव डिसऑर्डर, एडजेस्टमेंट डिसऑर्डर व आजकल इंटरनेट एडिक्शन इत्यादि होते हैं जबकि कुछ एब्नार्मल व्यवहार के लक्षण बाइपोलर मेनिया एवं स्किजोफ्रेनिया में आते हैं। यह स्टिग्मा दूर करने के लिए जन संवाद आवश्यक है ।
-डॉ. एमएल अग्रवाल वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ एवं होप सोसायटी के अध्यक्ष
उचित उपचार और संवेदनशील सहयोग से सुधार संभव
मानसिक स्वास्थ्य ही संपूर्ण स्वास्थ्य का अभिन्न अंग है। सामाजिक कलंक और भेदभाव के डर से लोग अक्सर अपनी परेशानी साझा करने या उपचार लेने से बचते हैं। इस वर्ष विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की थीम अनुभवों को मिले आवाज, आवाज से आए बदलाव हमें पीड़ितों के अनुभव सुनने और उनके आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं व नीतियों में सुधार करने का संदेश देती है। मानसिक बीमारी कमजोरी नहीं है। समय पर विशेषज्ञ की सलाह, उचित उपचार और संवेदनशील सहयोग से सुधार संभव है।
- डॉ. दीपक गुप्ता, मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट,प्रेसिडंट आईएमए कोटा
इन लक्ष्णों को न करें नजरअंदाज, चिकित्सक से लें सलाह
व्यवहार, नींद, खानपान या एकाग्रता में दो सप्ताह से अधिक बदलाव बने रहें तो विशेषज्ञ की मदद लें। परिजनों का संवेदनशील सहयोग, चिकित्सकीय सलाह के अनुसार दवा और नियमित फॉलोअप व्यक्ति को पढ़ाई, नौकरी और सामान्य जीवन में लौटने में मदद कर सकते हैं। परेशानी को छिपाएं नहीं, संकेतों को अनदेखा न करें। किसी की बात सुनना, उसे समझना और समय पर उपचार तक पहुंचाना उसकी जिंदगी में बदलाव की शुरूआत बन सकता है।
-डॉ. मिथलेश खींची मेडिकल कॉलेज अस्पताल की वरिष्ठ मनोचिकित्सक

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