Gen-Z का नजरिया: हाई-टेक और पारदर्शी डिजिटल वोटिंग ही भविष्य की कुंजी
तकनीक के साथ चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के पक्ष में युवा
कोटा। भारत में एक तरफ जहाँ लोकसभा और राज्यों के विधानसभा चुनावों समेत राजस्थान के नगर निगम चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से कराए गए हैं, वहीं आगामी पंचायत चुनावों को लेकर एक अनूठा प्रयोग देखने को मिल रहा है। इस बार पंच और सरपंच के चुनाव पारंपरिक मतपत्र (बैलट पेपर) से कराए जा रहे हैं, जबकि पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के भाग्य का फैसला ईवीएम से होगा। चुनाव प्रक्रिया के इस दोहरे तरीके के बीच आज की युवा पीढ़ी यानी हमारी Gen-Z क्या सोचती है? क्या देश को हाई-टेक डिजिटल वोटिंग की ओर पूरी तरह बढ़ जाना चाहिए या फिर मतपत्र ही पारदर्शिता की सबसे मजबूत कुंजी हैं। इसी मुद्दे पर ‘दैनिक नवज्योति’ की टीम ने शहर के युवाओं से बातचीत की मतदान की प्रक्रिया पर अपनी राय कुछ इस प्रकार बयां की।
चुनाव की निष्पक्षता और पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण है, चाहे मतदान ईवीएम से हो या बैलेट पेपर से। ईवीएम पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय तकनीकी कमियों की पहचान कर सुधारों पर जोर देना चाहिए। चुनाव लोकतंत्र का उत्सव है। जेन जी के प्रतिनिधि के रूप में मैं तकनीक के साथ आगे बढ़ने और ईवीएम को प्राथमिकता देने के पक्ष में हूं।
-उर्वशी मेवाड़ा, विद्यार्थी
जब आज अधिकांश चुनाव ईवीएम के माध्यम से हो रहे हैं और दुनिया तेजी से डिजिटलीकरण की ओर बढ़ रही है, तब लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया मतदान भी आधुनिक तकनीक आधारित होनी चाहिए। पंचायती राज चुनाव 2026 में सरपंच एवं वार्ड पंच के चुनाव बैलेट पेपर से कराने के बजाय डिजिटल मतदान पर विचार किया जाना चाहिए।
-अक्षत बाबरिया जैन, विद्यार्थी
जब दुनिया तेजी से तकनीकी की ओर बढ़ रही तो चुनाव भी ईवीएम से होनी चाहिए साथ ही ईवीएम मशीनों पर समय-समय पर राजनीतिक दल द्वारा जो आराेप लगाएं जाते है उनका समाधान जनता के सामने करना चाहिए। जिससे चुनाव प्रक्रिया पारदर्शिता से संपन्न होगी।
-विश्वास आचोलिया, विद्यार्थी
चाहे चुनाव ईवीएम से हो या बैलट पेपर पर जनता का भरोसा सबसे ऊपर होना चाहिए। यदि ईवीएम का उपयोग हो तो VVPAT पर्चियों का शत-प्रतिशत मिलान या पर्याप्त सत्यापन होना चाहिए।साथ ही जब भी ईवीएम पर चुनाव प्रक्रिया का आयोजन हो उससे पहले ईवीएम का डेमो मतदाताओं के समक्ष चुनाव होना चाहिए। जिससे सभी की शंकाओं का समाधान होगा। और चुनाव संपन्न होने के बाद किसी भी प्रकार का विवाद भी नहीं होगा।
- नवीन शर्मा, विद्यार्थी
राजस्थान के पंचायत चुनाव में यह दोहरा प्रयोग भले ही प्रशासनिक और तकनीकी सीमाओं के कारण किया जा रहा हो, लेकिन देश का दीर्घकालिक भविष्य हाई-टेक, सुरक्षित और पारदर्शी डिजिटल वोटिंग प्रणाली में ही निहित है। मशीन है जो इंटरनेट, ब्लूटूथ या वाई-फाई से नहीं जुड़ती, जिससे इसे रिमोटली हैक करना संभव नहीं है। ईवीएम पर मतदान होने के बाद बीप की आवाज आती है जिससे पता चल जाता है कि वोट किस को दिया है वहीं मतदाता इस प्रक्रिया को देख सकता हैं।
-बिपाशा शर्मा, विद्यार्थी

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