VOICE OF Gen-Z & Alpha : जो मैदान की बारीकियों को नहीं जानता, वह मैदान के भविष्य का फैसला कैसे कर सकता
मैदान पर खेल खिलाड़ी खेलता है, लेकिन उसके पीछे लिए गए फैसले उसके पूरे सफर को प्रभावित कर सकते हैं
कोटा। जिन्होंने जीवन में कभी क्रिकेट खेला ही नहीं है। उन्होंने अपनी राजनीतिक पहुँच का फायदा उठाकर पदों तक पहुँच बनाई है। और उनमें से कुछ तो अभी भी पदाधिकारी बने हुए हैं। जो खिलाड़ी घंटों तक पिच व ग्राउंड पर पसीना बहाता है, वह पदाधिकारी बनने से वंचित रह जाता है। जो रसूखदार लोग हैं, वे इन पदों पर आसीन हो जाते हैं, इन सवालों को लेकर 'दैनिक नवज्योति' ने जब शहर के युवाओं से बातचीत की।जब खेल संस्थाओं में पदाधिकारियों की बात आती है, तो यह सवाल जरूर उठना चाहिए कि उन पदों पर बैठे लोगों को खेल की कितनी समझ है।
मेरे विचार से, अगर कोई पदाधिकारी स्वयं खेल के क्षेत्र से जुड़ा रहा हो या उसे खेल का अच्छा अनुभव हो, तो वह खिलाड़ियों और खेल से जुड़े फैसलों को कहीं बेहतर तरीके से समझ सकता है। शिक्षक बच्चों को पढ़ाने जाए और उसने खुद तैयारी ही न की हो, तो कैसे समझ पाएगा।
-ममता मखीजा, विद्यार्थी
प्रभावीशाली लोग राजनीति के साथ-साथ अब खेलों में भी प्रभाव का फायदा उठाकर पदाधिकारी बन रहे है जो खिलाड़ियों के साथ एक तरीके से खिलवाड़ हैं। वहां योग्यता, खेल की समझ, अनुभव, पारदर्शिता और जवाबदेही को महत्व मिलना चाहिए। आखिर खिलाड़ी मैदान में अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए वर्षों मेहनत करता है। तो उसके भविष्य और उसके प्रदर्शन से जुड़े फैसले लेने वालों से भी इतनी उम्मीद तो की ही जा सकती है कि वे अपना ‘होमवर्क' पूरा करके आएं।
- जितेेंद मीणा, विद्यार्थी
खेल संस्थाओं में पदाधिकारी निवार्चित होने के लिए प्रभावशाली लोग आकर पदाधिकारी के लिए नामांकन करते है जो कि गलत है। देखा जाएं तो मेरी नजर में जब सरकारी नौकरी प्राप्त करने के लिए शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य है तो खेल संघ का पदाधिकारी निर्वाचित होने के लिए भी सरकार को कोई मापदंड निर्धारित करने चाहिए। जिससे जो खिलाड़ी वर्षों से मैदान में मेहतन कर रहे है उनके भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ नहीं होगा। साथ ही उनकी परेशानियों का भी तुरंत ही समाधान होगा।
-लोकेेंद्र सिंह, विद्यार्थी
देखा जाएं तो खेल संघ में पदाधिकारी बने के लिए खिलाड़ी को ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए। क्योकि जब खिलाड़ी खेल संघ में पदाधिकारी बनेंगे तो वे खिलाड़ियों की समस्याओं को अच्छी तरीके से समझाते है, और उन समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास भी करेंगे। क्योकि अनेक बार अन्य व्यक्ति आकर जब किसी संघ में पदाधिकारी बनाता है तो उसको काम की समझ नहीं होने के चलते वहां खुद ही समस्याओं से घिर जाता है ऐसी स्थिति में वहां खिलाड़ियों में वहां खिलाड़ियों की समस्याओं का समाधान कैसे करेंगे।
- तनुश्री विद्यार्थी
पूर्व खिलाड़ी खुद चयन के मानसिक दबाव, खराब इंफ्रास्ट्रक्चर, चोटों से उबरने के संघर्ष और जमीनी स्तर की परेशानियों से गुजर चुके होते हैं, इसलिए वे कागजी खानापूर्ति के बजाय धरातल पर उतरकर तुरंत और पारदर्शी फैसले ले सकते हैं। पूर्व खिलाड़ियों के प्रशासन में आने से न केवल भाई-भतीजावाद और राजनीतिक रसूख पर लगाम लगेगी जिस तरह सरकारी नौकरियों में निश्चित योग्यता अनिवार्य होती है, ठीक उसी तरह खेल संघों के चुनाव लड़ने के लिए भी कड़े खेल मापदंड तय होने चाहिए।
- राशि विद्यार्थी

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