कोटा में विद्यार्थियों का ‘अपना परिवार’ बना आईएचओके
शिकायत से समाधान तक... हॉस्टल, मेस, परीक्षा और प्रशासनिक समस्याओं में बन रहा सहारा
कोटा। देश की कोचिंग नगरी कोटा में पढ़ाई के लिए आने वाले विद्यार्थियों के सामने किताबों और परीक्षाओं के अलावा कई दूसरी चुनौतियां भी होती हैं। घर से दूरी, हॉस्टल और मेस की समस्याएं, परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की चिंता और मानसिक दबाव के बीच ‘इट हैपन्स ओनली इन कोटा’ (आईएचओके) विद्यार्थियों के लिए मदद और संवाद का भरोसेमंद मंच बनकर उभरा है। वर्ष 2011 में बिहार के अंशु महाराज ने इसकी शुरुआत एक छोटे सोशल मीडिया पेज के रूप में की थी। आज यह मंच लाखों विद्यार्थियों तक पहुंच चुका है।
शिकायत से समाधान तक पहुंचाने का प्रयास
आईएचओके से जुड़े विद्यार्थी हॉस्टल, मेस, आवास, परीक्षा, प्रशासनिक दिक्कतों और व्यक्तिगत समस्याओं को मंच पर साझा करते हैं। टीम इन समस्याओं को संबंधित लोगों तक पहुंचाने और समाधान कराने का प्रयास करती है। अंशु महाराज के अनुसार, कई विद्यार्थी पहली बार लंबे समय के लिए परिवार से दूर रहते हैं। ऐसे में अकेलापन और पढ़ाई का दबाव उनके लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। मंच के जरिए विद्यार्थियों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की जाती है कि वे अकेले नहीं हैं।
कोरोना में चला ‘SendUsBackHome’ अभियान
आईएचओके की सबसे बड़ी पहलों में कोरोना महामारी के दौरान चलाया गया ‘SendUsBackHome’ अभियान शामिल रहा। लॉकडाउन में कोटा में फंसे विद्यार्थियों की घर वापसी के लिए टीम ने उनकी आवाज प्रशासन और अधिकारियों तक पहुंचाई। टीम के अनुसार, अभियान के जरिए 50 हजार से अधिक विद्यार्थियों को घर पहुंचाने में मदद मिली। करीब 15 दिनों तक नि:शुल्क भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था में भी टीम ने सहयोग किया।
नीट परीक्षार्थियों को पहुंचाया परीक्षा केंद्र
परीक्षा के दौरान भी मंच विद्यार्थियों की मदद करता रहा है। नीट परीक्षा के समय कुछ स्थानों पर ऑटो चालकों द्वारा अधिक किराया वसूले जाने की शिकायतों के बाद आईएचओके ने अपनी गाड़ियों से विद्यार्थियों को नि:शुल्क परीक्षा केंद्र तक पहुंचाया। टीम के अनुसार, 100 से अधिक विद्यार्थियों को इसका लाभ मिला। परीक्षा की तारीख, केंद्र और प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी सूचनाएं भी विद्यार्थियों तक पहुंचाई जाती हैं।
किताबों से लेकर खेल तक का साथ
आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की मदद के लिए आईएचओके ने पुरानी किताबों का बैंक बनाया है। विद्यार्थियों से किताबें एकत्र कर जरूरतमंदों को नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। वहीं पढ़ाई के तनाव को कम करने के लिए क्रिकेट प्रतियोगिताएं, संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। ‘राइज अप कोटा’ जैसे अभियानों के जरिए विद्यार्थियों को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया गया।
22 सदस्य संभाल रहे संचालन
आईएचओके के संचालन में अंशु महाराज के साथ करीब 22 सदस्य जुड़े हैं। टीम में मेडिकल और इंजीनियरिंग स्ट्रीम से जुड़े युवा भी शामिल हैं। सोशल मीडिया के साथ टीम जरूरत पड़ने पर विद्यार्थियों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं समझती है और प्रशासन तथा पुलिस से भी सहयोग लेती है।
अंशु महाराज के अनुसार, आईएचओके का उद्देश्य केवल सोशल मीडिया सामग्री साझा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को ऐसा माहौल देना है, जहां वे अपनी बात खुलकर रख सकें। यही वजह है कि कई विद्यार्थी इसे महज सोशल मीडिया पेज नहीं, बल्कि कोटा में घर से दूर उनका ‘अपना परिवार’ मानते हैं।

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