किडनी फेल्योर प्रसूताओं पर अब साइड इफेक्ट की मार, आंखों के सामने छा रहा अंधेरा
काम छोड़कर अस्पतालों के चक्कर काटने को मजबूर परिजन
कोटा। जिस घर का आंगन मातृत्व प्रेम से चहकना था, वहां अब हर सप्ताह डायलिसिस की चिंता और अनहोनी का डर पसरा हुआ है। किडनी फेल्योर के बाद अब इसके साइड इफेक्ट और जटिलताएं प्रसूताओं की जिंदगी को और मुश्किल बना रही हैं। आंखों में धुंधलापन, अचानक बेहोश हो जाना, दौरे पड़ना, तेज सिर दर्द और बुखार 100 डिग्री पार कर जाना जैसी तकलीफों ने पांच महीने से इन महिलाओं और उनके परिवारों की जिंदगी बदल दी है। प्रसूताओं व परिजनों ने नवज्योति से साझा की आपबीती...पेश है प्रमुख अंश।
अचानक आंखों के सामने आ जाता अंधेरा
प्रसूता रागिनी बताती हैं, सिजेरियन डिलीवरी के बाद से जिंदगी अनिश्चिता के ऐसे भंवर में फंस गई, जो पांच माह बाद भी निकल नहीं पा रही। किडनी तो गंवा बैठे अब आंखों में भी धुंधलापन रहने लगा है। कई बार 15 से 20 मिनट तक आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है। रागिनी के साथ धन्नी, पिंकी और आरती भी आंखों में धुंधलापन और अचानक अंधेरा छा जाने की शिकायत कर रही हैं। डायलिसिस के दौरान पर्मकैथ (ट्यूब) साफ किया जाता है। लेकिन मवाद व क्लॉट के जमा होने से पर्ककैथ फटने से जिंदगी का डर सताता है।
दौरे और सिर की नसों में सूजन ने बढ़ाया खौफ
आरती के पति चंकू चौबदार के अनुसार, पिछले महीने से आरती को दौरे पड़ने लगे हैं। कुछ समय के लिए वह अचेत हो जाती है। तेज सिरदर्द, हाथ-पैर सुन्न होना और रातभर बेचैनी जैसी स्थिति रहती है। गत 28 सितंबर को लगातार सिरदर्द की शिकायत पर आरती को मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले गए थे। डॉक्टर ने एमआरआई कराई, जिसमें सिर की नसों में सूजन की बात सामने आई, आरती का वजन करीब 55 किलो था, जो घटकर करीब 40 किलो रह गया।
डायलिसिस का दिन डरावना, बढ़ जाती बैचेनी
प्रसूताओं का कहना है कि किडनी फेल होने के बाद लगातार नए लक्षण सामने आने से डर और बढ़ गया है। हर नई तकलीफ के साथ मन में यही सवाल उठता है कि अब आगे क्या होगा। डायलिसिस का दिन बेहद ही डरावना होता है। 4 घंटे मशीनों के साथ रहने के बाद 13 से 14 घंटे तक उल्टियां होना, 100 डिग्री से ज्यादा तेज बुखार, सिर दर्द, कंपकपी छुटना जैसी असहनीय तकलीफों से गुजरना पड़ता है।
घर से फोन आते ही अनहोनी के डर से सहम जाता दिल
धन्नी बाई के पति मोहन सुमन टैक्सी चलाते हैं। पत्नी दिनभर गुमसुम रहती है। तेज बुखार, बीपी बढ़ने और आंखों में धुंधलापन की शिकायत रहती है। कई बार काम के बीच घर से फोन आता है तो अनहोनी के डर से दिल सहम जाता है। वहीं, आरती के पति चंकू रेस्टोरेंट में काम करते हैं। उनका कहना है कि फोन पर पत्नी के अचानक बेहोश होने की सूचना मिलने पर काम छोड़कर घर भागना पड़ता है।
कब तक झेलें पीड़ा, ट्रांसप्लांट करवा दो किड़नी
रागिनी के भाई विकास कहते हैं, पांच महीने से बीमारी से लड़ रहे परिवारों की मांग अब स्थायी इलाज और किडनी ट्रांसप्लांट है। मां बनने के बाद शुरू हुई यह जिंदगी अस्पताल, डायलिसिस और डर के बीच नहीं, सामान्य जिंदगी में लौटनी चाहिए। प्रसूताओं ने सरकार से मांग की है कि कब तक पीड़ा भुगते, अब तो किड़नी ट्रांसप्लांट करवा दो। हमारे साथ बच्चों की जिंदगी भी दांव पर लगी है।
प्राचार्य ने नहीं दिया जवाब
इस मामले को लेकर नवज्योति ने मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. निलेश जैन को अपना पक्ष रखने के लिए कई बार कॉल किए लेकिन उन्होंने अटैंड नहीं किए। इसके बाद उन्हें मैसेज किया, जिसका भी जवाब नहीं दिया।

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