फर्जी मेडिकल प्रमाणपत्र घोटाले में 4 और डॉक्टर गिरफ्तार, अब तक 100 से अधिक संदिग्ध चिह्नित
33 लोगों की गिरफ्तारी पहले हो चुकी
जयपुर। राजस्थान में फर्जी FMG स्क्रीनिंग परीक्षा प्रमाणपत्र के आधार पर मेडिकल इंटर्नशिप करने और पंजीयन कराने के मामले में स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) ने विदेश से MBBS करने वाले 4 और डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी FMG स्क्रीनिंग परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाए थे और उन्होंने कथित तौर पर 27 से 30 लाख रुपये तक देकर फर्जी प्रमाणपत्र बनवाए थे।
SOG के अनुसार, इस संबंध में पुलिस थाना SOG जयपुर में 4 फरवरी 2026 को प्रकरण संख्या 08/26 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और 120बी में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।
100 से अधिक लोगों की पहचान :
जांच में सामने आया कि विदेश से MBBS की डिग्री प्राप्त करने के बाद भारत में मेडिकल प्रैक्टिस के लिए आवश्यक पंजीयन से पहले निर्धारित FMG स्क्रीनिंग परीक्षा उत्तीर्ण करना जरूरी है। आरोप है कि परीक्षा में सफल नहीं होने वाले अभ्यर्थियों ने कथित तौर पर बिचौलियों के माध्यम से कूटरचित प्रमाणपत्र बनवाए और उनके आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन के लिए आवेदन किया तथा विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप की।
SOG के अनुसार, अब तक 100 से अधिक ऐसे व्यक्तियों को चिह्नित किया जा चुका है। मामले में राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार सहित कुल 33 लोगों की गिरफ्तारी पहले हो चुकी है।
गिरफ्तार चार डॉक्टरों का विवरण :
1. भारत भूषण: पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने किर्गिस्तान से MBBS किया था और 2022 में भारत लौटा था। FMG स्क्रीनिंग परीक्षा में कई बार असफल होने के बाद उसने कथित तौर पर 30 लाख रुपये देकर फर्जी प्रमाणपत्र बनवाया। इसके आधार पर राजकीय मेडिकल कॉलेज, दौसा में इंटर्नशिप की।
2. सौरव शर्मा: आरोपी ने 2017 से 2023 तक रूस में MBBS की पढ़ाई की और 2023 में भारत लौटा। पुलिस के अनुसार, उसने कथित तौर पर 27 लाख रुपये देकर फर्जी FMG प्रमाणपत्र बनवाया और राजकीय मेडिकल कॉलेज, धौलपुर में इंटर्नशिप की। इसके बाद राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन के लिए आवेदन किया।
3. हिमांशु शर्मा: पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने रूस से 2017 से 2023 के बीच MBBS किया था। FMG परीक्षा में सफल नहीं होने पर उसने कथित तौर पर 27 लाख रुपये देकर फर्जी प्रमाणपत्र बनवाया और महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज, जयपुर में इंटर्नशिप की। उसने भी राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन के लिए आवेदन किया। पुलिस के अनुसार, सौरव शर्मा और हिमांशु शर्मा आपस में ममेरे-फुफेरे भाई हैं।
4. शिवम चौधरी: आरोपी ने 2016 से 2021 तक कजाकिस्तान में MBBS की पढ़ाई की और 2021 में भारत लौटा। पुलिस के अनुसार, उसने कथित तौर पर 30 लाख रुपये देकर फर्जी FMG प्रमाणपत्र बनवाया और राजकीय मेडिकल कॉलेज, अलवर में इंटर्नशिप की। इसके बाद उसने राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन के लिए आवेदन किया।
बिचौलियों के जरिए बनवाए जाते थे फर्जी प्रमाणपत्र :
SOG की जांच में भानाराम माली, शुभम गुर्जर, इन्द्रराज गुर्जर और अन्य लोगों की कथित भूमिका सामने आई है। पुलिस के अनुसार, इन लोगों ने फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने के नाम पर प्रति व्यक्ति 20 से 30 लाख रुपये तक वसूले।
पुलिस ने बताया कि इस मामले में विदेश से MBBS करने वाले 28 डॉक्टरों, राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, यूडीसी अखिलेश माथुर, एलडीसी फरहान हसन, मुख्य आरोपी भानाराम माली और एक दलाल सहित कई लोगों को पहले गिरफ्तार किया जा चुका है।

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