किसी को छत, किसी को परिवार, किसी को नई जिंदगी की राह दिखा रहा 'आश्रय'
करणी नगर विकास समिति का सेवा प्रकल्प बना जरूरतमंदों का सहारा
कोटा। किसी जरूरतमंद को भोजन देना सेवा है, बेसहारे को छत देना मानवता, लेकिन किसी के जीवन को नई दिशा देकर उसे समाज की मुख्यधारा से जोड़ना सबसे बड़ी सेवा है। कोटा में झालावाड़ रोड स्थित करणी नगर विकास समिति का ह्यआश्रयह्ण सेवा केंद्र इसी संकल्प के साथ जरूरतमंदों के जीवन में बदलाव लाने का प्रयास कर रहा है। परित्यक्त नवजातों को परिवार दिलाने से लेकर अनाथ बच्चों की परवरिश, संकटग्रस्त महिलाओं को आश्रय और बुजुर्गों को सम्मानजनक जीवन देने तक, संस्था की गतिविधियां सेवा का व्यापक स्वरूप प्रस्तुत करती हैं।
समिति का मूल मंत्र है, ह्लजो हाथ दूसरों की मदद के लिए उठते हैं, वे प्रार्थना करने वाले होठों से अधिक पवित्र हैं।ह्व इसी भावना के साथ संस्था की गतिविधियां ममता, आश्रय और श्रद्धा नामक तीन परिसरों में संचालित होती हैं। यहां दत्तक ग्रहण, महिला पुनर्वास, वृद्धाश्रम, परिवार परामर्श और विशेष बच्चों के उपचार जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं।
एक हजार से अधिक शिशुओं को मिला आश्रय
संस्था की प्रमुख गतिविधियों में शिशु देखभाल और दत्तक ग्रहण शामिल हैं। असुरक्षित परिस्थितियों में छोड़े गए नवजातों के लिए शिशुगृह सुरक्षित ठिकाना बनता है। संस्था के अनुसार, अब तक एक हजार से अधिक शिशुओं को यहां आश्रय मिल चुका है। पात्र बच्चों को केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए) की निर्धारित प्रक्रिया के तहत परिवार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाती है।
बाल आश्रम में छह से 18 वर्ष तक के करीब 60 बालकों के रहने, भोजन, शिक्षा और चिकित्सा की व्यवस्था है। बच्चों को पढ़ाई के साथ व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर दिया जाता है।
बुजुर्गों की देखभाल, विशेष बच्चों का उपचार
ह्यश्रद्धाह्ण वृद्धाश्रम में उपेक्षित वरिष्ठ नागरिकों को आवास और देखभाल उपलब्ध कराई जाती है। संस्था के विवरण के अनुसार, यहां 50 कमरे हैं। फिजियोथेरेपी केंद्र, गहन देखभाल कक्ष और 24 घंटे नर्सिंग देखरेख जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
वर्ष 2020 में स्थापित सेरेब्रल पाल्सी केंद्र में सेरेब्रल पाल्सी, ऑटिज्म, डाउन सिंड्रोम और अन्य विकासात्मक चुनौतियों से जूझ रहे बच्चों को फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी और ऑक्यूपेशनल थेरेपी दी जाती है। संस्था के अनुसार, केंद्र में करीब 100 बच्चे सेवाएं प्राप्त कर रहे हैं।
आश्रम से गांवों तक पहुंचती मदद
समिति जरूरतमंद बुजुर्गों को किराना सामग्री उपलब्ध कराने के साथ दान में मिले कपड़े, खाद्यान्न और अन्य उपयोगी वस्तुएं रावतभाटा तथा शाहबाद के दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों तक पहुंचाती है। आश्रय भवन में ह्यदिवा-संगमह्ण कार्यक्रम के तहत प्रत्येक शनिवार विशेषज्ञों के व्याख्यान, गोष्ठियां, कवि सम्मेलन, मुशायरे और प्रदर्शनियां आयोजित की जाती हैं। संस्था के अनुसार, अब तक एक हजार से अधिक गोष्ठियां हो चुकी हैं। फिजियोथेरेपी केंद्र में प्रतिदिन करीब 60 लोग उपचार का लाभ लेते हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान
संस्था के सेवा कार्यों को राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर पहचान मिली है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, करणी नगर विकास समिति और प्रसन्ना भंडारी को वर्ष 2015 में पीएचडी चैंबर पुरस्कार तथा 2018 में जमनालाल बजाज फाउंडेशन पुरस्कार सहित विभिन्न सम्मानों से नवाजा गया। वर्ष 2018 में तत्कालीन उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू से पुरस्कार प्राप्त करने का उल्लेख भी संस्था की उपलब्धियों में है।
संस्था की स्थापना और विकास में नगेन्द्र बाला, आनन्द लक्ष्मण खांडेकर, प्रसन्ना भंडारी और महावीर चंद भंडारी का योगदान रहा है। समिति का प्रयास है कि जरूरतमंदों को केवल सहायता ही नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के साथ बेहतर भविष्य का अवसर भी मिले।

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