जयपुर में 'गोरधन के जूते' का शानदार मंचन, सामाजिक संदेश ने जीता दर्शकों का दिल
अंधविश्वास और रूढ़िवादिता पर तीखा प्रहार
जयपुर। जयपुर के महाराणा प्रताप सभागार में नाटक "गोरधन के जूते" का सफल मंचन हुआ। कार्यक्रम में 400 से अधिक दर्शक एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे और नाटक को खूब सराहा गया।
नाटक की कहानी
एक छोटे गाँव में सरपंच बंसी अपनी बेटी मथरा के विवाह की तैयारी में जुटा है। विवाह से पहले मथरा के बड़े पैरों के लिए उपयुक्त चप्पल न मिलना पूरे गाँव में बड़ा मुद्दा बन जाता है। संकीर्ण सोच और अंधविश्वास के बीच यह छोटी-सी समस्या बड़ा सामाजिक प्रश्न बन जाती है, जब सुझाव आता है कि दुल्हन को जूते पहनाकर विदा किया जाए। नाटक उजागर करता है कि समाज व्यक्ति की भावनाओं से ज़्यादा परंपरा और दिखावे को महत्व देता है। लेखक-निर्देशक देशराज गुर्जर की इस प्रस्तुति ने हास्य के साथ सामाजिक समानता, आत्मस्वीकृति और मानवीय संवेदनाओं पर गंभीर संदेश दिया। अंत में सभी कलाकारों और सहयोगियों का सम्मान एवं आभार व्यक्त किया गया।

Comment List