जयपुर शहर की सफाई पर हर माह करीब दस करोड़ खर्च, फिर भी लग रहे हैं कचरे के ढेर

यूजर चार्ज वसूलने पर भी सफाई व्यवस्था ठप

जयपुर शहर की सफाई पर हर माह करीब दस करोड़ खर्च, फिर भी लग रहे हैं कचरे के ढेर
गुलाबी नगरी जयपुर को स्वच्छ बनाने के तमाम सरकारी दावों के बीच नगर निगम की सफाई व्यवस्था वेंटिलेटर पर है। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और परिवहन पर हर महीने ₹10 करोड़ से अधिक फूंकने और जनता से भारी यूजर चार्ज वसूलने के बावजूद शहर की गलियां गंदगी से पटी हैं। बारिश के मौसम में यह लापरवाही डेंगू और मलेरिया जैसी गंभीर महामारियों को न्योता दे रही है।

जयपुर। गुलाबी नगरी को स्वच्छ और स्मार्ट बनाने के दावों के बीच नगर निगम की सफाई व्यवस्था सवालों के घेरे में है। शहर में डोर टू डोर कचरा संग्रहण, सड़क सफाई और कचरे के परिवहन पर हर महीने करीब 10 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद कई कॉलोनियों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर कचरे के ढेर आम दृश्य बने हुए हैं। करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी लोगों को स्वच्छ वातावरण नहीं मिल पा रहा।

निगम विद्याधर नगर, झोटवाड़ा, वैशाली, सांगानेर और जगतपुरा व झालाना जोनों में खुद के संसाधनों से डोर टू डोर कचरा संग्रहण पर ही करीब 5.10 करोड़ रुपए प्रतिमाह खर्च करता है। इसके अलावा ओपन कचरा डिपो से ट्रांसफर स्टेशन तक कचरा पहुंचाने पर डेढ़ करोड़ तथा ट्रांसफर स्टेशन से डंपिंग यार्ड तक परिवहन पर 1.50 करोड़ रुपए प्रतिमाह खर्च करता है। इसके अलावा प्रमुख सड़कों की मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग पर करीब 60 से 80 लाख रुपए प्रति माह खर्च करता है। इतने बड़े बजट के बावजूद कई क्षेत्रों में समय पर कचरा नहीं उठने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। सड़क किनारे पड़े कचरे से दुर्गंध फैल रही है, मच्छर और मक्खियों का प्रकोप बढ़ रहा है तथा आवारा पशु कचरे में भोजन तलाशते दिखाई देते हैं। स्कूलों, अस्पतालों और बाजारों के आसपास भी गंदगी लोगों की चिंता बढ़ा रही है। बरसात के मौसम में यह स्थिति डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ा सकती है। 

नगर निगम आधुनिक ट्रांसफर स्टेशन, इलेक्ट्रिक गार्बेज हॉपर और मैकेनाइज्ड सफाई जैसी योजनाओं को शहर की बड़ी उपलब्धि बता रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका पूरा असर दिखाई नहीं दे रहा। डोर टू डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था में गीले व सूखे कचरे का पृथक संग्रह भी प्रभावी ढंग से नहीं हो रहा, जबकि मालवीय नगर, मुरलीपुरा व मानसरोवर जोन में यूजर चार्ज के नाम पर करीब 80 लाख रुपए आमजन से वसूल भी कर रहा है।

शहर के बाहरी इलाकों में नहीं उठता कचरा

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डोर टू डोर कचरा संग्रहण के बाद हूपर ट्रांसफर स्टेशनों पर कचरा तो डाल देते है लेकिन कचरा वहां दो-तीन दिन पड़ा रहता है और समय पर कचरा नहीं उठने से गंदगी फैलने लगती है और आस-पास से लोगों को गुजरना भी मुश्किल हो जाता है। इसमें सांगानेर, गोनेर, मुरलीपुरा, मालवीय नगर, जगतपुरा, खो नागोरियान, जामडोली, मानसरोवर, जयसिंहपुरा खोर सहित शहर के विभिन्न इलाकों के साथ ही चारदीवारी क्षेत्र में छोटी छोटी गलियों के नुक्कड़ों पर कचरा फैला रहता है। 

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वसूला जा रहा शुल्क 

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डोर टू डोर कचरा संग्रहण के लिए यूजर्र से प्रतिमाह चार्ज वसूल किया जा रहा है। इसमें 50 वर्गमीटर तक के आवास पर 20 रुपए, 50 से 300 वर्गमीटर तक 80 रुपए एवं 300 से अधिक बड़े आवासीय बिल्डिंग से 150 रुपए लिया जा रहा है। वहीं वाणिज्यक संस्थानों से से 250 से 5000 रुपए शुल्क लिया जा रहा है। जिसमें दुकानों, कॉफी हाउस व खाने पीने के स्थान ढाबा मिठाई की दुकानों से 250 रुपए। इसके अलावा थ्री स्टार होटल से 1500 रुपए व उससे अधिक स्टार पर 3000 हजार रुपए, कोचिंग क्लासेज, निजी शैक्षणिक संस्थान व सरकारी शैक्षणिक संस्थानों जिसमें बैंक, बीमा कार्यालय से 700 रुपए, बड़े निजी कोचिंग क्लासेज से 1000 हजार रुपए, निजी कोचिंग संस्थानों से 5000 रुपए, क्लिनिक से 1000 रुपए, 50 बैड से तक अस्पताल से 2000 रुपए, 50 बैड से अधिक अस्पतालों से 4000 हजार रूपए, गोदाम, कोल्ड स्टोरेज से 1500 रुपए, शादी हॉल उत्सव, प्रदर्शनी स्थल (तीन हजार वर्गमीटर तक) 2000 हजार रुपए, एवं तीन हजार वर्गमीटर से अधिक पर पांच हजार रुपए शुल्क लिया जा रहा है।

जनस्वास्थ्य को गंभीर खतरा

शहर में जगह जगह कचरा और गंदगी फैली रहने से केवल पर्यावरण को ही नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य को भी गंभीर खतरा बना रहता है। इससे कई तरह की बीमारियां हो सकती है। अभी बारिश का सीजन भी है और ऐसे में यह ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। कचरे में जमे पानी से मच्छर पनपते हैं और इनसे डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया जैसी बीमारियां हो सकती हैं। गंदगी में बैठे मच्छर-मख्यियों के खुले में बिक रहे खाद्य पदार्थो पर बैठने से डायरिया, टायफाइड, हेपेटाइटिस-ए और ई हो सकता है। साथ ही त्वचा संबंधी बीमारियां भी होने की संभावना रहती है। 

डॉ. श्यामसुंदर, एचओडी मेडिसिन, 
ईएसआई मॉडल हॉस्पिटल 

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