राममंदिर चंदा चोरी मामले की उच्चत्तम न्यायालय की निगरानी में हो जांच: अजय उपाध्याय

रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग

राममंदिर चंदा चोरी मामले की उच्चत्तम न्यायालय की निगरानी में हो जांच: अजय उपाध्याय
कांग्रेस प्रवक्ता अजय उपाध्याय ने जयपुर में प्रेस वार्ता कर अयोध्या राम मंदिर के चंदे में कथित अनियमितताओं पर केंद्र को घेरा। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट को तुरंत भंग करने, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने और पूरे कोष का फॉरेंसिक ऑडिट कर रिपोर्ट सार्वजनिक करने की पुरजोर मांग की है।

जयपुर। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता अजय उपाध्याय ने राम मंदिर चंदा चोरी मामले की उच्चत्तम न्यायालय की निगरानी में जांच कराने, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तत्काल भंग करने, मंदिर में चढावे और चंदे का पूर्ण फॉरेसिंक ऑडिट कर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। उपाध्याय ने शनिवार को जयपुर में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में यह मांग की। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि ट्रस्ट के गठन, शीर्ष नियुक्तियों और प्रशासनिक निगरानी में उनकी सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय की क्या भूमिका रही है और इतने गंभीर आरोपों के बाद भी वे अब तक मौन क्यों हैं।

उन्होंने कहा कि इस मामले में चंपत राय, अनिल मिश्रा और इस पूरे घोटाले में शामिल सभी प्रभावशाली व्यक्तियों के विरुद्ध तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल आर्थिक घोटाला ही नहीं हैं, यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास ओर भावनाओं के साथ किया गया घोर विश्वासघात हैं। उपाध्याय ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम को करोड़ों भारतीयों की आस्था, संस्कृति और नैतिक चेतना के प्रतीक बताते हुए कहा कि देश के कोने कोने से गरीब, मजदूर, महिलाएं और श्रद्धालुओं अपनी मेहनत की कमाई, अपने गहने, अपनी बचत और अपनी श्रद्धा लेकर राम मंदिर निर्माण के लिए आगे आये। 

उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद और संघ परिवार के संगठनों ने लगभग तीन दशक तक भगवान राम के नाम पर राजनीति की , देश के गरीब एवं मध्यम वर्ग से राम के नाम पर चंदा एकत्र किया और इसी आंदोलन के आधार पर सत्ता प्राप्त की। आज वे ही करोड़ों रामभक्त यह पूछने को मजबूर है कि भगवान राम के नाम पर जुटाया गया चंदा और चढावा आखिर किसके संरक्षण में लूटा गया।

उन्होंने कहा कि सवाल है कि जब ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री की देखरेख में हुआ तो इस घोटाले की जवाबदेही कौन लेगा, अगर सब कुछ ठीक था तो ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे क्यों हुए एवं अगर कुछ गलत नहीं हुआ तो उच्चत्तम न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र जांच से डर किस बात का है।

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