निजी अस्पतालों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी : स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित, मरीज बिना इलाज लौटने को मजबूर
सामान्य इलाज की सुविधाएं प्रभावित
निजी अस्पतालों की हड़ताल से मरीजों को भारी परेशानी। ओपीडी, जांच और सामान्य इलाज सेवाएं प्रभावित, आपातकालीन सेवाएं सीमित रूप से जारी। मरीजों की भीड़ सरकारी अस्पतालों, जैसे एसएमएस और अन्य संस्थानों में बढ़ी।
जयपुर। निजी अस्पतालों की चल रही हड़ताल का असर अब आम मरीजों पर साफ दिखाई देने लगा है। विभिन्न निजी अस्पतालों के डॉक्टरों और प्रबंधन ने अपनी मांगों को लेकर सामूहिक रूप से सेवाएं सीमित कर दी हैं, जिसके कारण ओपीडी, जांच और सामान्य इलाज की सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं।
हालांकि, आपातकालीन सेवाएं कुछ अस्पतालों में जारी रखी गई हैं, लेकिन नियमित मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हड़ताल के चलते शहर के कई बड़े निजी अस्पतालों में मरीजों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। दूर-दराज से इलाज के लिए आए लोगों को बिना उपचार वापस लौटना पड़ा। मरीजों और उनके परिजनों ने सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की है। निजी अस्पताल संचालकों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार के समक्ष आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। वहीं, स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक प्रभावित हो सकती हैं।
वहीं, निजी अस्पतालों की हड़ताल के कारण सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है। शहर के कांवटिया, एसएमएस, गणगौरी, जयपुरिया सहित अनय सरकारी अस्पतालों में ओपीडी और आईपीडी दोनों का प्रतिशत बढ़ गया है। वहीं, शाम को चिकित्सक संगठनों की रैली भी प्रस्तावित है। रैली के बाद आंदोलन को प्रदेश स्तर पर ले जाने का निर्णय लिया जाएगा।

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