पॉक्सो कोर्ट का फैसला : नाबालिग का अपहरण कर दुष्कर्म करने वाले अभियुक्त को 20 साल की सजा, जानें पूरा मामला
अभियुक्त के प्रति नरमी का रुख नहीं अपनाया जा सकता
पॉक्सो विशेष अदालत ने 17 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी नागा संतोष दास को 20 साल कारावास और 60 हजार रुपए जुर्माने की सजा। आरोपी ने पीड़िता की गरिमा को आहत किया, इसलिए नरमी नहीं बरती जा सकती।
जयपुर। पॉक्सो मामलों की विशेष अदालत क्रम 1, महानगर प्रथम ने 17 साल की नाबालिग को बहला फुसला कर अपने साथ ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने वाले अभियुक्त नागा संतोष दास को बीस साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने अभियुक्त पर साठ हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। पीठासीन अधिकारी मीना अवस्थी ने अपने आदेश में कहा कि अभियुक्त ने अपने से करीब आधी उम्र की पीड़िता के साथ दुष्कर्म कर उसकी गरिमा को आहत करने वाला कृत्य किया है।
ऐसे में अभियुक्त के प्रति नरमी का रुख नहीं अपनाया जा सकता। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुरेन्द्र सिंह राजावात ने अदालत को बताया कि घटना को लेकर पीड़िता के पिता ने 27 मई, 2025 को बजाज नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि उसकी 17 साल की बेटी 26 मई की शाम मंदिर की साफ सफाई करने गई थी, लेकिन बाद में वह घर नहीं लौटी। रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए 28 मई को सिरोही से पीड़िता को बरामद कर अभियुक्त को गिरफ्तार किया। सुनवाई के दौरान पीड़िता ने अदालत को बताया कि कुंभ स्नान के दौरान उसके परिवारवालों की संतोष दास से पहचान हुई थी। इसके बाद वह उसके मामा के निधन पर 13 दिन तक उसके नाना के घर रुकने के बाद उनके घर आकर कुछ दिन रुका था। इसके बाद वह 22 मई, 2025 को वापस उनके घर आकर रुका था। इस दौरान 23 मई को अकेला पाकर उसने उसके साथ दुष्कर्म किया। वहीं 26 मई को जब वह मंदिर से घर लौट रही थी तो संतोष दास उसे सिरोही ले गया। अभियुक्त 28 मई को उसे बाजार में बैठाकर पैसे निकालने गया तो उसके पिता और पुलिस दोनों को जयपुर ले आए।

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