गणपति बप्पा मोरिया के जयघोष के साथ निकली शोभायात्रा, 80 से अधिक झांकियों का जुड़ा कारवां

हाथी-घोड़े-ऊंट-बैंडबाजे ने शोभायात्रा में चार चांद लगाए

गणपति बप्पा मोरिया के जयघोष के साथ निकली शोभायात्रा, 80 से अधिक झांकियों का जुड़ा कारवां
ऋषि पंचमी पर मोती डूंगरी गणेश मंदिर से गणपति की 38वीं शोभायात्रा निकली। महंत पं. कैलाश शर्मा ने आरती कर शोभायात्रा रवाना। जेएलएन मार्ग से सांगानेरी गेट, जौहरी बाजार, छोटी चौपड़ होते हुए गढ़ गणेश मंदिर पहुंची शोभायात्रा में 80 से अधिक झांकियां शामिल हुईं।

जयपुर। गणेश चतुर्थी पर दर्शन देने के बाद ऋषि पंचमी पर प्रथम पूज्य गणपति पिता शिव, मां पार्वती, पत्नी रिद्धी-सिद्धी और पुत्रों शुभ-लाभ सहित अनेक देवी-देवताओं के साथ छोटीकाशी के श्रद्धालुओं को दर्शन देने नगर भ्रमण पर निकले। मोती डूंगरी गणेश मंदिर से रवाना हुई 38वीं शोभायात्रा को मंदिर महंत पं. कैलाश शर्मा ने आरती उतारकर रवाना किया। गणपति बप्पा मोरिया के गगनभेदी जयघोष के साथ शोभायात्रा जेएलएन मार्ग पहुंची तो 80 से अधिक झांकियों का कारवां जुड़ गया। हाथी-घोड़े-ऊंट-बैंडबाजे ने शोभायात्रा में चार चांद लगा दिए। गणपति की स्वचालित झांकियां आकर्षण का केन्द्र रहीं। गणेश जी की विविध लीलाओं से जुड़ी झांकियां भी कम मन मोहक नहीं थीं।

जयकारों के साथ शोभायात्रा सांगानेरी गेट होते हुए जौहरी बाजार पहुंची तो पुष्प वर्षा कर स्वागत करने और गणेश जी की आरती उतारने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा था। हर सौ मीटर पर स्वागत मंच बनाए गए। संतों-महंतों, जन प्रतिनिधियों, अधिकारियों, व्यापारियों और आम लोगों ने विघ्न हर्ता की आरती उतारी। बड़ी चौपड़, त्रिपोलिया बाजार, छोटी चौपड़, गणगौरी बाजार, चौगान चौराहा और ब्रह्मपुरी पहुंचने पर शोभायात्रा में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ता गया। छतों और बरामदों पर खडेÞ लोगों ने पुष्प वर्षा की। मार्ग में जगह-जगह स्टॉल लगाकर प्रसाद वितरण किया गया। रात्रि को शोभायात्रा गढ़ गणेश मंदिर पहुंची। यहां महंत प्रदीप औदीच्य ने आरती की। शोभायात्रा को देखते हुए शहर के कई प्रमुख रास्तों पर ट्रैफिक बदला गया। परिक्रमा मार्ग पर वाहनों की आवाजाही रोकी गई। वहीं कुछ जगहों से वाहनों को दूसरे रास्तों से भेजा गया। शोभायात्रा में 80 से ज्यादा झांकियां शामिल थीं। इनमें 20 से ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक झांकियां थीं। पृथ्वी पर नृत्य करते गणेशजी, पिता शिव की पीठ पर खेलते बालरूप, नीले घोडेÞ पर सवार गणेशजी और शेषनाग पर नृत्य करते बप्पा की झांकियां आकर्षण रहीं। रिद्धि-सिद्धि के साथ घूमर नृत्य की झांकी भी थी।

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