विश्व संग्रहालय दिवस: खजाना महल म्यूजियम में ब्राजील से लाए गए दुर्लभ स्वयंभू ब्रह्मा-विष्णु-महेश अमेथिस्ट एगेट का होगा प्रदर्शन

जयपुर म्यूजियम में दिखेगा 'ब्रह्मा-विष्णु-महेश' रूपी दुर्लभ पत्थर

विश्व संग्रहालय दिवस: खजाना महल म्यूजियम में ब्राजील से लाए गए दुर्लभ स्वयंभू ब्रह्मा-विष्णु-महेश अमेथिस्ट एगेट का होगा प्रदर्शन

विश्व संग्रहालय दिवस पर जयपुर के खजाना महल में ब्राजील से लाया गया 100 किलो वजनी अमेथिस्ट एगेट पत्थर प्रदर्शित किया जाएगा। इस प्राकृतिक रत्न में तीन जुड़े हिस्से हैं, जो कैलाश पर्वत और त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) का आभास कराते हैं। यह दुर्लभ भूगर्भीय नमूना आध्यात्मिक और मानसिक उपचार गुणों के लिए भी खास है।

जयपुर। विश्व संग्रहालय दिवस के अवसर पर खजाना महल जेम एंड ज्वेलरी म्यूजियम ने ब्राजील से प्राप्त एक असाधारण दुर्लभ अमेथिस्ट एगेट पत्थर को प्रदर्शित करने की घोषणा की है। इस पत्थर में प्राकृतिक रूप से तीन जुड़े हुए हिस्से हैं जो कैलाश पर्वत जैसे दिखते हैं और उनमें स्वयंभू रूप में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का आभास होता है। 100 किलोग्राम वजनी यह सिंगल पीस में निकला अमेथिस्ट पत्थर भूगर्भीय कला का अनूठा उदाहरण है। अमेथिस्ट क्रिस्टल के भीतर एक कैल्साइट का टुकड़ा भी समाया हुआ है और तीनों गोलाकार जुड़े हुए अमेथिस्ट एगेट खंड इसे भूगर्भीय और आध्यात्मिक दृष्टि से दुर्लभ नमूना बनाते हैं।

म्यूजियम निदेशक अनूप श्रीवास्तव ने कहा कि यह टुकड़ा केवल अपनी दुर्लभता के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है। इसमें गहरी धार्मिक भावना भी है और भावनात्मक व मानसिक उपचार के गुणों के लिए भी इसे महत्व दिया जाता है। अमेथिस्ट एगेट को भावनाओं में संतुलन लाने, तनाव कम करने और नकारात्मक ऊर्जा से बचाव करने वाला माना जाता है। म्यूजियम विश्व संग्रहालय दिवस पर इस नई प्राप्ति को जौहरी बाजार सेट  के प्रवेश द्वार पर रखेगा ताकि यह आगंतुकों को सबसे पहले दिखाई दे। खजाना महल म्यूजियम पत्थर से आभूषण तक के सफर को दर्शाने के लिए जाना जाता है और यह टुकड़ा उसी कथा से जुड़ता है क्योंकि यह कटाई या पॉलिश से पहले का प्राकृतिक रूप दिखाता है।

अनूप श्रीवास्तव ने बताया कि म्यूजियम के पास पहले से ही 8.5 फुट ऊंचा अमेथिस्ट एगेट ड्रूजी दो हिस्सों में प्रदर्शित है। ब्राजील भूड के जुड़ने से खजाना महल की स्थिति और मजबूत हुई है जो भारत के उन गिने-चुने म्यूजियम में है जो पूरी तरह रत्न, खनिज और आभूषण विरासत को समर्पित हैं। जयपुर में स्थित खजाना महल म्यूजियम यह दर्शाता है कि जयपुर सदियों से रत्न कटाई और आभूषण निर्माण का वैश्विक केंद्र रहा है। इसके संग्रह में कच्चे पत्थर, पॉलिश किए गए रत्न, पारंपरिक आभूषण और निर्माण, ग्रेडिंग व शिल्प को समझाने वाले इंटरैक्टिव प्रदर्शन शामिल हैं। आगंतुक दुर्लभ खनिज, विरासत आभूषण और पत्थर कटाई व जड़ाई की लाइव डेमो देख सकते हैं।

म्यूजियम शिक्षा और संरक्षण पर भी ध्यान देता है। यह नियमित रूप से छात्रों, डिजाइनरों और पर्यटकों के लिए सत्र आयोजित करता है ताकि वे रत्नों के विज्ञान और संस्कृति को समझ सकें। भूगर्भीय नमूनों को आभूषण इतिहास के साथ जोड़कर खजाना महल आगंतुकों को वैज्ञानिक संदर्भ और सांस्कृतिक सराहना दोनों प्रदान करता है। ब्रह्मा-विष्णु-महेश अमेथिस्ट एगेट के जुड़ने के साथ म्यूजियम का लक्ष्य विश्व संग्रहालय दिवस और आने वाले पर्यटन सीजन में भक्तों और रत्न प्रेमियों दोनों को आकर्षित करना है।

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