ब्रीडिंग सेंटर और गणना : आंकड़ों में झलकती आशा की किरण, 14,753 वर्ग किमी क्षेत्र में सोलर और पवन ऊर्जा पर रोक ; संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता

2025 की वन्यजीव गणनना में आए सुखद आंकडे

ब्रीडिंग सेंटर और गणना : आंकड़ों में झलकती आशा की किरण, 14,753 वर्ग किमी क्षेत्र में सोलर और पवन ऊर्जा पर रोक ; संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता

राज्य पक्षी गोडावण को बचाने के उच्च स्तर के प्रयास नहीं हुए तो दो दशक में यह नष्टप्राय हो जाएगा। ये चेतावनी है जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के वाइल्डलाइफ रिसर्च सेंटर निदेशक  डॉ.  हेमसिंह गहलोत की। हाईटेशन लाइनों पर अभी तक बर्ड डायवर्टर नहीं लगे। शिकार भी हो रहे हैं। अब महज 122 ही बचे हैं और हर साल दो से तीन मारे जा रहे।

जोधपुर/जैसलमेर। राज्य पक्षी गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) को बचाने के उच्च स्तर के प्रयास नहीं हुए तो दो दशक में यह नष्टप्राय हो जाएगा। ये चेतावनी है जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के वाइल्डलाइफ रिसर्च सेंटर निदेशक  डॉ.  हेमसिंह गहलोत की। हाईटेशन लाइनों पर अभी तक बर्ड डायवर्टर नहीं लगे हैं। शिकार भी हो रहे हैं। अब महज 122 ही बचे हैं और हर साल दो से तीन मारे जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही गोडावण को विलुप्त होने से बचाने के लिए फैसला सुनाया, जिसमें राजस्थान और गुजरात के 14,753 वर्ग किमी में बड़े सोलर पार्क, पवन ऊर्जा प्रोजेक्ट और हाईटेंशन ओवरहेड बिजली लाइनों पर रोक लगा दी है।

अब 2 मेगावाट से बड़े नए सोलर प्रोजेक्ट, नई पवन चक्कियां और हाईटेंशन ओवरहेड बिजली लाइनें नहीं लगाई जा सकेंगी। कोर्ट ने पूर्व आईएएस  और पर्यावरणविद् एम.के. रंजीत सिंह की याचिका पर 19 दिसम्बर 2025 को फैसला सुनाते हुए ऐतिहासिक टिप्पणी की, जिसका सबसे ज्यादा असर जैसलमेर और बाड़मेर जिलों पर पड़ेगा। इन्हें भूमिगत करना था, लेकिन नहीं किया। गहलोत बताते हैं, घास ही इनका चारा है। लेकिन कुत्तों और मवेशियों का बढ़ना खतरनाक है। यह प्राजेक्ट 13 जून 2005 को राज्य सरकार ने शुरू किया था। 

संरक्षण करना है तो इन बातों का रखे ध्यान 
एन्क्लोजर तो बनाएं ताकि  आवारा पशु अंदर नहीं जाए। इनका अंडा जमीन पर रहता है और बड़ा होता है। इसे कुत्ते और मवेशी नुकसान पहुंचाते हैं। 

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भारत-पाकिस्तानतनाव को लेकर रामदेवरा से 5 और सम से 4 गोडावण को अजमेर शिफ्ट किया था।  ब्रीडिंग सेंटर पर 53 गोडावण हैं। वाटर हॉल पद्धति में 73 गोडावण नजर आए है। 

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पूर्व सीएम ने 2013 में शुरू किया था प्रोजेक्ट
गोडावण पक्षी के संरक्षण व बचाव के लिए जून 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड शुरू किया था. लेकिन इसके कुछ ही महीने बाद ही उनकी सरकार चली गयी और मामला ठंडे बस्ते में चला गया. वसुंधरा सरकार ने रामदेवरा के पास गोडावण अंडा संकलन केंद्र और कोटा में हेचरी बनाने के प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया था।

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देशभर में 1 हजार थे गोडावण  
कुछ दशक पहले देश में ये 1000 से अधिक थे। 1978 में 745 थे, जो 2001 में 600 और 2008 में 300 रह गये। दिल्ली के इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय में सह आचार्य और गोडावण बचाने के लिए काम कर रहे डॉ. सुमित डूकिया के अनुसार अब ज्यादा से ज्यादा 150 गोडावण बचे हैं जिनमें 122 राजस्थान में और 28 पड़ोसी गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक तथा आंध्र प्रदेश में हैं। अंडे अब केवल जैसलमेर वाले देते हैं।

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14,013 वर्ग किमी तक बढ़ा राजस्थान में संरक्षित क्षेत्र
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में गोडावण के लिए संरक्षित क्षेत्र बढ़ाकर 14,013 वर्ग किलोमीटर कर दिया है। इसमें जैसलमेर के सम, पोकरण, लाठी, धोलीया, चाचा, ओढ़ाणिया और बाड़मेर से सटे कई इलाके शामिल हैं। 

क्या है बर्ड डायवर्टर : गोडावण की दृष्टि कमजोर होती है। उड़ान भरते समय उन्हें और भी कम दिखता है। बिजली के तार दूरी से नजर नहीं आते। नजदीक आने पर जब तार दिखते हैं तो काया भारी होने से वे अपनी दिशा नहीं बदल पाते और करंट की चपेट में आने से मारे जाते हैं। ऐसे में तारों में हर 25 मीटर की दूरी पर बर्ड डायवर्टर लगाए जाते हैं जो बड़ी गेंद के आकार में सफेद रंग के होते हैं। इससे गोडावण को बिजली के तारे दूर से दिख जाते हैं। 

भूमिगत करे या शिफ्ट करे हाईटेंशन लाइने
सुप्रीम कोर्ट ने 33 केवी, 66 केवी और कई जगह 400 केवी तक की मौजूदा बिजली लाइनों को अंडरग्राउंड करने या दूसरी जगह शिफ्ट करने का आदेश दिया है। लगभग 250 किलोमीटर लंबी बिजली लाइनों को अगले दो वर्षों में भूमिगत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

पिछले साल वाटर हॉल पद्धति से की गई गणना के अनुसार फील्ड में गोडावण की संख्या 73 दर्ज की गई। दूसरी ओर ब्रीडिंग सेंटर में भी गोडावण की संख्या में इजाफा हो रहा है। जैसलमेर के रामदेवरा व सम स्थित ब्रीडिंग सेंटरों में गोडावण की संख्या बढ़कर 68 पहुंच गई है। रामदेवरा ब्रीडिंग सेंटर में इनकी संख्या 50 और सम में इनकी संख्या 18 है। फरवरी-मार्च इनके अंडे देने का सीजन होता है। इनकी संख्या बढ़ने की संभावना है। 
बृजमोहन गुप्ता, डीसीएफ, डीएनपी (वाइल्ड लाइफ), जैसलमेर 

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