आसाराम की उम्रकैद यथावत : करना होगा सरेंडर, दो सह आरोपी बरी
दस्तावेजी साक्ष्य और गवाहों के आधार पर फैसला
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म मामले में आसाराम उर्फ आसूमल की अपील पर बड़ा फैसला सुनाते हुए कुछ धाराओं में दोषमुक्ति दी, जबकि कई गंभीर धाराओं में ट्रायल कोर्ट की आजीवन कारावास सजा को बरकरार रखा। जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेन्द्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने आसाराम सहित सह आरोपियों की अपीलों पर 92 पेज के विस्तृत निर्णय में मामले के साक्ष्यों, पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट, कॉल डिटेल, दस्तावेजी साक्ष्य और गवाहों के आधार पर फैसला सुनाया।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा, पीड़िता की गवाही विश्वसनीय और भरोसेमंद है तथा उसे केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि मेडिकल रिपोर्ट में बाहरी चोटें कम पाई गईं। कोर्ट ने माना कि पीड़िता उस समय नाबालिग थी और आरोपी के प्रभाव तथा भय के कारण उसने प्रतिरोध नहीं कर पाई। पॉक्सो अधिनियम की धारा 7/8 के तहत अपराधों के लिए उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखा गया है। साथ ही एक लाख रुपया जुमार्ना भी यथावत रखा गया। कोर्ट ने सहआरोपी संचिता उर्फ शिल्पी एवं शरतचंद की ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा को रद्द कर दोनो सह आरोपियों को बरी कर दिया।

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