जोधपुर में 24 घंटे में दो प्रसूताओं की मौत, मातृ स्वास्थ्य तंत्र पर उठे गंभीर सवाल
महात्मा गांधी अस्पताल में 2 प्रसूताएं भर्ती
जोधपुर। राजस्थान में प्रसूताओं की मौत के बढ़ते मामलों के बीच अब जोधपुर भी चिंता का केंद्र बन गया है। गत 24 घंटे में दो प्रसूताओं की मौत ने सरकारी मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। इससे पहले कोटा, बीकानेर और बांसवाड़ा में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। गंभीर तथ्य यह है कि गत एक माह में जोधपुर में 16 प्रसूताओं की हालत बिगड़ी, जिनमें से 7 महिलाएं अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं।
फिलहाल उम्मेद अस्पताल में 5 प्रसूताओं का इलाज जारी।
महात्मा गांधी अस्पताल में 2 प्रसूताएं भर्ती।
इन्हीं मरीजों में वह प्रसूता भी शामिल, जिसे हाल ही में गलत रक्त चढ़ाने के मामले के बाद गंभीर अवस्था में भर्ती कराया गया था।
जवाब मांगते सवाल
क्या गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में एनीमिया की समय पर पहचान और उपचार हो रहा है।
क्या जिला और उपजिला अस्पतालों में प्रसवोत्तर रक्तस्राव से निपटने की पर्याप्त व्यवस्था है।
क्या रेफ रल प्रणाली समय पर और प्रभावी ढंग से काम कर रही है।
क्या लगातार सामने आ रहे मामलों की स्वतंत्र चिकित्सकीय ऑडिट कराई जाएगी।
पहला मामला: अत्यधिक रक्तस्राव ने ली जान
तिंवरी अस्पताल में 24 जून को समू की सामान्य प्रसव के दौरान बच्ची हुई। प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया। गंभीर स्थिति में उसे उम्मेद अस्पताल रेफर किया गया,रक्तस्राव नहीं रुकने पर चिकित्सकों को उसकी बच्चेदानी निकालनी पड़ी। इसके बाद भी हालत में सुधार नहीं हुआ और उसे महात्मा गांधी अस्पताल भेजा गया। लगातार वेंटिलेटर, डायलिसिस व बड़े पैमाने पर रक्त, प्लाज्मा और अन्य रक्त घटक चढ़ाने के बावजूद रविवार देर रात उसकी मृत्यु हो गई। चिकित्सकों के अनुसार अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसे हाइपोवोलेमिक शॉक हुआ, जिससे किडनी सहित अन्य महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो गए।
दूसरा मामला: 20 दिन इलाज के बाद मौत
दूसरी प्रसूता डिंपल को 30 जून को मथुरादास माथुर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसी दिन प्रसव हुआ। प्रसव के बाद उसकी तबीयत लगातार खराब बनी रही और लगभग 20 दिन इलाज चलता रहा। रविवार रात अचानक हालत बिगड़ने पर दोबारा अस्पताल लाया गयाए लेकिन चिकित्सक उसे बचा नहीं सके।

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