तीन बार सीपीआर दिया, तब लौटी प्रसूता की धड़कनें, पांचवें दिन भी वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रही पुष्पा

नेफ्रोलॉजी चिकित्सकों की विशेष निगरानी में चल रहा इलाज

तीन बार सीपीआर दिया, तब लौटी प्रसूता की धड़कनें, पांचवें दिन भी वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रही पुष्पा
प्रसव के बाद तेज रक्तस्राव, 5-6 यूनिट खून चढ़ाने के बाद हालत बिगड़ने पर कोटा किया था रेफर।

कोटा । कोटा मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में नेफ्रोलॉजी आईसीयू में भर्ती बारां निवासी प्रसूता पुष्पा बैरवा की हालत पांचवे दिन मंगलवार को भी क्रिटिकल बनी हुई है। वह वेंटिलेटर पर है और जिंदगी व मौत के बीच संघर्ष कर रही है। रविवार रात उसकी धड़कनें लगभग थम-सी गईं थी। चिकित्सकों ने तीन बार सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देकर उसे बचाने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद धड़कनें लौटी और ब्लड प्रेशर में भी सुधार हुआ। इसके बावजूद पांचवें दिन मंगलवार को भी पुष्पा की हालत गंभीर बनी हुई है। वह वेंटिलेटर पर है और बिना मशीन के सांस नहीं ले पा रही। बारां निवासी पुष्पा का कोटा मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के नेफ्रोलॉजी आईसीयू में उपचार चल रहा है।
पुष्पा का यह पहला प्रसव था। उसे झालावाड़ अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 27 अक्टूबर को उसने स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। प्रसव सामान्य हुआ, लेकिन करीब एक घंटे बाद अचानक अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया। चिकित्सकों ने ब्लीडिंग रोकने के प्रयास किए और 5 से 6 यूनिट रक्त भी चढ़ाया, लेकिन स्थिति नियंत्रित नहीं हो सकी। हालत बिगड़ने पर उसे कोटा रेफर किया गया।

सीपीआर के बाद लौटी धड़कन, बीपी में सुधार
चिकित्सकों के अनुसार, रविवार रात पुष्पा को सांस लेने में परेशानी होने लगी और ब्लड प्रेशर भी काफी गिर गया। इस दौरान उसकी धड़कनें लगभग बंद होने की स्थिति में पहुंच गईं। चिकित्सकों ने तीन बार सीपीआर दिया। लगातार प्रयासों के बाद धड़कनें वापस लौटीं और बीपी में भी सुधार हुआ। रक्तस्राव भी नियंत्रित हो गया। मंगलवार को भी उसका ब्लड प्रेशर संतोषजनक रहा, लेकिन सांस लेने के लिए अब भी वेंटिलेटर का सहारा लेना पड़ रहा है।

24 घंटे में 1400 एमएल यूरिन आउटपुट
इलाज के दौरान कुछ संकेत राहत देने वाले भी हैं। चिकित्सकों के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में पुष्पा का यूरिन आउटपुट करीब 1400 एमएल रहा। वह होश में है और ब्लड प्रेशर भी बेहतर है। हालांकि, फेफड़ों में परेशानी के कारण उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही है। वेंटिलेटर सपोर्ट जारी है। नेफ्रोलॉजी विभाग के चिकित्सक उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं। फिलहाल उसे खतरे से बाहर नहीं माना जा सकता।

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