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Read More... voice of gen-z & alpha : इलाज पहले या पैसों का हिसाब? मानवता को प्राथमिकता देने की उठी आवाज
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By kota
युवाओं ने कहा, गंभीर मरीजों को पहले मिले उपचार, गरीबों के लिए बने रियायत की नीति। असर खबर का : दूसरे दिन भी चिकित्सा टीम ने शंभूपुरा का किया घर-घर सर्वे
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By kota
गंभीर संक्रमण के मरीज को इलाज के लिए एमबीएस किया रैफर। इलाज कराएं या दिहाड़ी बचाएं, शंभुपुरा वासियों के सामने दो वक्त की रोटी का संकट, 24 किमी दूर मरीज को अस्पताल लेकर आने - जाने में 400 से 500 रुपए होते खर्च
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By kota
हाइवे किनारे बसा वार्ड, फिर भी परिवहन से दूर। कोटा मेडिकल कॉलेज हादसा : 15 दिन में आनी थी रिपोर्ट, 3 माह से इंतजार
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By kota
कैथेटर सहित 6 मेडिकल डिवाइसों की जांच रिपोर्ट अटकी, अस्पतालों में हो रही किल्लत, भेजा रिमाइंडर। 6 माह गुजरे जाने, नहीं खुल पाई मदर लैब
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कीमती मशीनें 4 महीने बाद भी पैकिंग से बाहर नहीं निकल सकीं। असर खबर का : अवैध वाहनों पर परिवहन विभाग की सख्त कार्रवाई शुरू
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By kota
अस्पताल परिसर में नियम उल्लंघन पर 150 वाहनों को नोटिस जारी मरीज निजी अस्पताल में भर्ती, सरकारी मशीनरी रिपोर्ट में कह रही स्वस्थ
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गंभीर रूप से बीमार एक मरीज का कोटा के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। ब्लड सप्लाई रुकने से पैर कटने की नौबत, जयपुर के डॉक्टरों ने सर्जरी कर बचाई जिंदगी
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By Jaipur NM
जयपुर के मणिपाल हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने एंडोवेस्कुलर तकनीक से जटिल वैस्कुलर सर्जरी कर मरीज खातुम बानू का पैर कटने से बचा लिया। ब्लड सप्लाई रुकने से पैर की उंगलियां काली पड़ चुकी थीं। वैस्कुलर सर्जन डॉ. गोविन्द प्रसाद दुबे की टीम ने एंजियोप्लास्टी कर ब्लॉकेज हटाए और रक्त संचार बहाल किया। अरनेठा पीएचसी में डॉक्टर पद रिक्त, मरीज परेशान
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एक माह से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित, नियुक्ति की मांग तेज। चाहे दवा का रैपर कट फट जाए, मरीज की सुरक्षा के लिए हर हाल में एक्सपायरी डेट मिले
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By kota
दवाओं की एक्सपायरी डेट सुनिश्चित करने के लिए क्या कोड नंबर सिस्टम होना चाहिए? असर खबर का - ऑक्सीजन समय पर नहीं मिलने से सीएचसी में महिला रोगी की मौत का मामला, एक डॉक्टर सहित चार कर्मचारियों को किया गया एपीओ
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By kota
इब्राहिम सामुदायिक चिकित्सालय में महिला मरीज की ऑक्सीजन सिलेंडर समय पर न लगने से मौत के बाद सीएमएचओ डॉ. साजिद खान ने निरीक्षण किया। चार कर्मचारियों को एपीओ किया गया और तीन सदस्यीय जांच समिति गठित हुई। अस्पताल में सुधार के निर्देश दिए गए, हर दो बेड के बीच ऑक्सीजन सिलेंडर लगाने का निर्णय लिया गया। पीड़ित परिवार ने FIR दर्ज कराई। नहीं दिखते ट्रॉली मेन, तीमारदार खुद स्ट्रेचर खींचने को मजबूर
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By kota
अस्पताल में स्ट्रेचर और व्हीचेयर की कमी के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 