voice of gen-z & alpha : इलाज पहले या पैसों का हिसाब? मानवता को प्राथमिकता देने की उठी आवाज
इलाज की दरों में पारदर्शिता के साथ जरूरतमंदों को मिले आर्थिक राहत
कोटा। केन्द्र सरकार के अस्पतालों और अन्य चिकित्सा संस्थानों में इलाज और सुविधाओं की दरें प्रमुखता से प्रदर्शित करने के आदेश का गलत बताया। युवाओं का कहना है कि अस्पतालों में शुल्क की जानकारी देना पारदर्शिता के लिहाज से जरूरी हो सकता है, लेकिन आपात स्थिति में मरीज की जान बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इलाज के लिए आर्थिक रूप से संघर्ष कर रहे परिवारों को भी राहत मिलनी चाहिए, ताकि पैसों की कमी किसी जरूरतमंद को बेहतर उपचार से वंचित न कर दे। दैनिक नवज्योति के ह्यवाइस ऑफ यूथ एंड अल्फाह्ण अभियान के तहत युवाओं ने निजी अस्पतालों में इलाज की प्रक्रिया और शुल्क व्यवस्था को लेकर अपनी राय रखी।
पहले इलाज, फिर भुगतान की प्रक्रिया
सामान्य बीमारी के उपचार के लिए अस्पताल आने वाले मरीज अक्सर पहले ही फीस और जांच संबंधी खर्च की जानकारी ले लेते हैं। लेकिन दुर्घटना, गंभीर बीमारी या अन्य आपात स्थिति में मरीज और उसके परिजनों के पास निर्णय लेने के लिए पर्याप्त समय नहीं होता। ऐसे समय में शुल्क संबंधी औपचारिकताओं के कारण उपचार में देरी नहीं होनी चाहिए। अस्पतालों को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए पहले मरीज की स्थिति का आकलन कर आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने को प्राथमिकता देनी चाहिए।
-मोनिका पारेता, कॉलेज स्टूडेंट
पहले इलाज होना चाहिए
अस्पताल में कोई आपात मरीज आता है तो सबसे पहले उसका उपचार होना चाहिए। इलाज शुरू करने से पहले खर्च का हिसाब बताना उचित नहीं है, खासकर तब जब मरीज की हालत गंभीर हो। सामान्य बीमारी के लिए आने वाले लोग पहले ही फीस और खर्च के बारे में पूछ सकते हैं, लेकिन गंभीर मरीज के मामले में प्राथमिकता उसकी जान बचाना होनी चाहिए। गरीब मरीज पूरा भुगतान नहीं कर पाते हैं तो सरकार को उनकी मदद के लिए व्यवस्था करनी चाहिए।
-सूरज सिंह, कॉलेज स्टूडेंट
जरूरतमंदों को मिले रियायत
मरीज का इलाज पहले होना चाहिए, न कि उसे सबसे पहले अस्पताल के खर्च की चिंता में डाल दिया जाए। यदि कोई मरीज तत्काल भुगतान करने में सक्षम नहीं है तो अस्पताल प्रशासन को उसकी परिस्थिति समझते हुए भुगतान के लिए समय देना चाहिए। जरूरतमंद मरीजों को उपचार में रियायत देने की व्यवस्था भी होनी चाहिए। स्वास्थ्य सेवाओं में मानवता और संवेदनशीलता को प्राथमिकता मिले, ताकि आर्थिक परेशानी किसी मरीज के लिए अतिरिक्त संकट न बन जाए।
-संस्कार मीणा, कॉलेज स्टूडेंट
सरकार बनाए मदद की नीति
सरकारी अस्पतालों की तुलना में कई निजी अस्पतालों में बेहतर सुविधाएं और उपचार के विकल्प मिलते हैं, लेकिन इनका खर्च गरीब परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। सरकार को ऐसी नीति बनानी चाहिए, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को निशुल्क या रियायती दरों पर उपचार मिल सके। अस्पताल में प्रवेश करते ही शुल्क की सूची देखकर मरीज और उसके परिजन घबरा सकते हैं। इसलिए शुल्क की पारदर्शिता के साथ जरूरतमंदों को आर्थिक राहत देने पर भी ध्यान देना चाहिए।
- दीपक गौतम,कॉलेज स्टूडेंट

Comment List