110 किलोवाट का सोलर, फिर भी बिजली बिल का करंट झेल रहा अस्पताल
अस्पताल की जरूरतों के बजाय बंद प्लांट पर लगी सोलर क्षमता
कोटा। सरकारी अस्पतालों को बिजली के भारी-भरकम बिलों से राहत दिलाने के लिए सोलर सिस्टम लगाए जा रहे हैं, लेकिन कैथून सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में यह व्यवस्था ही सवालों के घेरे में आ गई। यहां कुल 110 किलोवाट क्षमता का सोलर सिस्टम लगा होने के बावजूद अस्पताल प्रशासन हर महीने 70 से 75 हजार रुपए का बिजली बिल चुका रहा है। हैरानी यह है कि अस्पताल की बिजली खपत का बड़ा हिस्सा मरीजों की सुविधाओं, चिकित्सा संसाधनों और दवाओं के रखरखाव पर खर्च होता है, लेकिन यहां महज 15 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगाया गया है। जबकि, दूसरी ओर 94 किलोवाट क्षमता का सोलर उस ऑक्सीजन प्लांट पर लगा है, जो फिलहाल संचालित ही नहीं हो रहा।
बंद ऑक्सीजन प्लांट पर 94, अस्पताल पर 15 किलोवाट का सोलर
कैथून सीएचसी से मिली जानकारी के अनुसार, अस्पताल परिसर में कुल 110 किलोवाट क्षमता का सोलर सिस्टम लगा है लेकिन लोड सेटिंग अलग-अलग की गई है। इसमें 94 किलोवाट का सिस्टम ऑक्सीजन प्लांट के लिए और 15 किलोवाट का सिस्टम सीएचसी के लिए लगाया गया है। ऑक्सीजन प्लांट वर्तमान में संचालित नहीं हो रहा। जिसकी वजह से वहां लगाए बड़े सोलर सिस्टम से बन रही बिजली का उपयोग नहीं हो पा रहा है। वहीं, अस्पताल की जरूरतों के मुकाबले कम क्षमता का सोलर सिस्टम होने से बिजली बिल में अपेक्षित राहत नहीं मिल रही।
गर्मियों में 1 लाख, सर्दियों में 75 हजार का बिल
अस्पताल का बिजली बिल गर्मियों में प्रतिमाह करीब एक लाख रुपए तक पहुंच जाता है। सर्दियों में भी यह 70 से 75 हजार रुपए के बीच रहता है। सोलर सिस्टम लगने के बाद भी अस्पताल को हर महीने हजारों रुपए बिजली बिल के रूप में चुकाने पड़ रहे हैं। जबकि, सोलर सिस्टम लगे हुए 7-8 माह हो चुके हैं, तब से ही यह स्थिति बनी हुई है। ऐसे में सोलर सिस्टम लगाने का उद्देश्य बिजली खर्च में कमी लाना, पूरी तरह से साकार नहीं हो पा रहा।
सोलर लगा, अब उपयोगिता साबित करने की चुनौती
मरीजों के परिजन शैलेन्द्र, योगेश, प्रभुलाल ने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सोलर सिस्टम लगाने का मकसद बिजली खर्च कम करना और उपलब्ध बजट का उपयोग मरीजों की सुविधाओं को बेहतर बनाने में करना है। लेकिन, कैथून सीएचसी का मामला बताता है कि केवल सोलर सिस्टम स्थापित कर देना पर्याप्त नहीं है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि बंद ऑक्सीजन प्लांट पर लगे सोलर सिस्टम का उपयोग अस्पताल के हित में करने की दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं और सीएचसी को हर महीने चुकाए जा रहे भारी बिजली बिल से कब मरीजों को राहत मिलती है।
ऑक्सीजन प्लांट पर 94 किलोवाट और सीएचसी में 15 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगा हुआ है। वर्तमान में आॅक्सीजन प्लांट संचालित नहीं हो रहा है। इसकी आवश्यकता सीएचसी में ज्यादा है। ऐसे में मामले को उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाकर ऑक्सीजन प्लांट पर लगाए गए सौलर को सीएचसी (अस्पताल) पर शिफ्ट करने का प्रयास कर रहे हैं।
-डॉ. राजेश सामर, चिकित्सा प्रभारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कैथून

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