निर्माण में अधिग्रहण प्रक्रिया की स्वीकृति का इंतजार

परिक्रमा मार्ग 6 से 12 मीटर चौड़ा होगा

निर्माण में अधिग्रहण प्रक्रिया की स्वीकृति का इंतजार
शिलान्यास के तीन माह बाद भी शुरु नहीं हो सका मथुराधीश कोरिडोर निर्माण कार्य।

कोटा। धार्मिक पर्यटन के रूप में कोटा की पहचान बनाने के लिए किए जाने वाले मथुराधीश कोरिडोर निर्माण व सौन्दर्यीकरण का कार्य शिलान्यास के तीन माह बाद भी शुरु नहीं हो सका है। यह काम अभी तक अधिग्रहण की स्वीकृति के इंतजार में अटका हुआ है।
कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से मथुराधीश कोरिडोर का निर्माण व विकास और सौन्दर्यीकरण किया जाएगा। इस पर कुल 66.25 करोड़ रुपए खर्च होने हैं। इसके पहले चरण के कार्य का शिलान्यास 22 फरवरी को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया था। उसके बाद से अभी तक तीन माह से अधिक का समय हो गया है लेकिन काम शुरु नहीं हो सका है।

यह होना है काम
मथुराधीश कोरिडोर निर्माण के तहत पाटनपोल स्थित मंदिर के आस-पास की सड़कों को चौड़ा करना, मंदिर के परिक्रमा मार्ग का सौन्दर्यीकरण, पार्किंग सुविधा व बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए होटल निर्माण समेत कई कार्य किए जाने हैं। पहले चरण में 18.24 करोड़ की लागत से सिविल कार्य किए जाएंगे। वहीं सड़क चौड़ीकरण के तहत मार्ग में आने वाले मकानों, दुकानों, धर्मशालाओं और मंदिर परिसर की जमीन का अधिग्रहण किया जाना है।

200 मीटर लम्बा व 40 फीट बनेगा एलिवेटेड रोड
केडीए की ओर से किए जाने वाले इस कार्य के तहत पहले चरण में मंदिर को चम्बल रिवर फ्रंट से जोडऩे के लिए करीब 200 मीटर लम्बा व 40 फीट चौड़ा एलिवेटेड रोड बनाया जाएगा। पहले यह रोड मंदिर से भट्टजी घाट की पुलिया तक ही प्रस्तावित था। अब इसे रिवर फ्रंट के गणेश पोल घाट तक बढ़ाया जाएगा। इससे मंदिर व रिवर फ्रंट के बीच एक नया कनेक्टिंग कोरिडोर विकसित हो जाएगा।वहीं मंदिर के पीछे स्थित नामदेव धर्मशाला से भट्टजी घाट तक सड़क को 40 फीट और परिक्रमा मार्ग को 6 से 12 मीटर चौड़ा किया जाएगा।

अधिग्रहण पर खर्च होंगे करीब 30 करोड़ रुपए
कोरिडोर निर्माण के तहत सड़क चौड़ीकरण के लिए 15 से अधिक मकानों व दुकानों के साथ ही मंदिर की 15 हजार वर्गफीट जमीन को अग्रिहण किया जाना है। अधिग्रहण के मुआवजे पर करीब 30 करोड़ रुपए खर्च होंगे। जबकि सौन्दर्यीकरण पर 36.25 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

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व्यस्त बाजार व आवासीय क्षेत्र
इधर सूत्रों के अनुसार मथुराधीश मंदिर पुराने शहर के पाटनपोल में स्थित है। इसके कोरिडोर का विकास करने के लिए मार्ग में आने वाले मकानों व दुकानों को अधिग्रहित किया जाना है। जबकि इस क्षेत्र में व्यस्त बाजार व आवासीय क्षेत्र है। इस कारण से अधिग्रहण में केडीए अधिकारियों को कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसी कारण से अभी तक काम भी शुरु होने में समय लग रहा है।

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इनका कहना है
मथुराधीश कोरिडोर निर्माण के पहले चरण के काम का शिलान्यास हो गया है। इस काम के लिए जिन मकानों व दुकानों और धर्मशालाओं व जमीन का अधिग्रहण किया जाना है उसके मुआवजे के लिए 30 करोड़ रुपए का प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भेजा हुआ है। वहां से स्वीकृति मिलने का इंतजार है। स्वीकृति मिलने के बाद अधिग्रहण की प्रक्रिया होने के बाद ही निर्माण कार्य शुरु हो सकेगा।
- मुकेश चौधरी, सचिव, कोटा विकास प्राधिकरण

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