शहर ट्रैफिक सिग्नल फ्री, पैदल चलने वालों के लिए जेब्रा क्रॉसिंग ही नहीं

फुटपाथ हैं तो उन पर अतिक्रमण की भरमार

शहर ट्रैफिक सिग्नल फ्री, पैदल चलने वालों के लिए जेब्रा क्रॉसिंग ही नहीं
नागरिकों के सड़क पर सुरक्षित चलने के मौलिक अधिकार का हो रहा हनन।

कोटा। औद्योगिक से शिक्षा नगरी और अब पर्यटन नगरी के रूप में विकसित हो रहे कोटा शहर में जहां देशभर से लोगों का आवागमन रहता है। उस शहर को ट्रैफिक सिग् नल लाइट फ्री तो बना दिया। वाहन तो बिना रूके निर्बाध रूप से निकल रहे हैं। लेकिन नागरिकों के सड़क पर पैदल चलने के मौलिक अधिकार का हनन हो रहा है। पैदल चलने वालों के लिए सड़क पर फुटपाथ और जेब्रा क्रॉसिंग तक नहीं है। फुटपाथ हैं तो उन पर अतिक्रमण हो रखा है। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को एक अहम फैसले में कहा कि निर्धारित फुटपाथ पर चलने का अधिकार संविधान के तहत स्वतंत्र रूप से आने-जाने के मौलिक अधिकार का हिस्सा है। दो न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दिए गए इस फैसले में कहा गया कि इस अधिकार को मोटर वाहनों की आवाजाही और सुविधा पर प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

कोर्ट का यह आदेश सराहनीय व आमजन के हित में है। लेकिन कोटा जैसे शहर में जो स्मार्ट सिटी के रूप में चयनित है। उस समय में आबादी बढऩे के साथ ही वाहनों की संख्या भी कई गुना अधिक बढ़ी है। जबकि सड़कें सिकुड़ती जा रही है।

फुटपाथों पर दुकानदारों का कब्जा
कोटा शहर में तत्कालीन नगर विकास न्यास व नगर निगम की ओर से सड़क निर्माण के साथ ही हर जगह पर सड़क के दोनों तरफ फुटपाथ बनाए हुए हैं। कहीं छोटे तो कहीं बड़े हैं। लेकिन सड़क सीमा में बनी दुकानों के मालिकों ने अपनी दुकानों के सामान फुटपाथ पर फेला कर रखे हुए हैं। जिससे फुटपाथ पर पैदल चलने वालों के लिए जगह ही नहीं है।
कांग्रेस सरकार के समय में शहर में चौराहों के विकास व सौन्दर्यीकरण के साथ ही सड़कों को भी चौड़ा किया गया। वहीं इसके साथ बनाए गए फुटपाथ व पाथ वे पर आमजन के चलने के लिए लोहे की रैलिंग तक लगाई। लेकिन फुटपाथ पर दुकानदारों व फेरी वालों ने सामान रखकर कब्जा कर लिया। रैलिंग को चोर व नशेड़ी चोरी कर ले गए। जिससे आमजन की सुविधा व मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए खर्च किए गए लाखों-करोड़ों रुपए का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

जेबरा क्रासिंग नाम की
शहर में महावीर नगर, आर.के. पुरम् व श्रीनाथपुरम. रंगबाड़ी से लेकर दादाबाड़ी, शक्ति नगर, सीएडी रोड, तलवंडी, विज्ञान नगर, झालावाड़ रोड से लेकर नयापुरा और रेलवे स्टेशन तक फुटपाथ तो हैंलेकिन जेब्रा क्रासिंग नहीं है। जहां है वहां नाम की है। नयापुरा स्थित विवेकानंद सर्किल पर निजी ट्रेवल्स एजेंट व होटल रेस्टोरेंट वालों ने पुटपाथ पर ही अपने सामान रखे हुए हैं। झालावाड़ रोड पर पुटपाथ पर फद्दल के ठेले वालों का कब्जा है। रेलवे स्टेशन क्षेत्र में भी फुटपाथ पर कहीं थड़ी रखी हुई है तो कहीं होटल ढाबे वालों ने कब्जा किया हुआ है। विज्ञान नगर व स्टेशन क्षेत्र में फुटपाथ पर फास्ट फूड के ठेले लगे हुए हैं। जिससे पैदल चलने वाले अपने मौलिक अधिकार का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।

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सिग्नल फ्री बनाया तो खत्म हुए जेब्रा कॉसिंग
पिछली कांग्रेस सरकार के समय में कोटा शहर में ट्रैफिक के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए चौराहों का विकास किया गया। फ्लाई ओवर व अंडरपास बनाए गए। ऐसे में शहर को ट्रैफिक लाइट सिग् नल फ्री बनाया गया। लेकिन इस नवाचार के कारण चौराहों पर पैदल सड़क पार करने के लिए बनाए गए जेब्रा कॉसिंग खत्म कर दिए। जिससे पैदल सड़क पार करने वालों के लिए परेशानी तो हुई। साथ ही हादसों का खतरा बन गया। ट्रेफिक सिग् नल नहीं होने से बिना चौराहों पर रूकते ही नहीं। ऐसे में पैदल सड़क पार करने वालों को या तो वाहनों के कम होने का इंतजार करना पड़ता है या कई बार जल्दबाजी में सड़क पार करने पर हादसों का खरा बना रहता है। जबकि उच्चतम न्यायालय ने कहा कि स ड़क पर सुरक्षित पैदल चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार है।

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जिम्मेदार विभागों को करनी होगी व्यवस्था
नयापुरा निवासी देवेन्द्र विजय का कहना है कि कोटा में जेब्रा क्रॉसिंग तो लगभग खत्म से हो गए हैं। पैदल सडक पार करना किसी खतरे से कम नहीं है। वहीं फुटपाथ हैं तो उन पर अतिक्रमण हो रहे हैं। ऐसे में नगर निगम, केडीए या ट्रैफिक जिस भी विभाग की जिम्मेदारी है उन्हें नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए इनकी व्यवस्था करनी होगी।
पाटनपोल निवासी मनोज गौतम का कहना है कि शहर में कई जगह पर सुविधा के नाम पर आमजन के लिए परेशानी पैदा कर दी गई है। सिग् नल फ्री शहर में जेब्रा कॉसिंग तो होने ही चाहिए। यह संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।

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इनका कहना है
फुटपाथ पर पैदल चलना लोगों का अधिकार है। उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में भी यही कहा है। सरकार की जिम्मेदारी है कि पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ व जेब्रा क्रॉसिंग की व्यवस्था करना सरकार की जिम्मेदारी है। हमने हमारा काम किया अब नई सरकार उसे सुधार ले। जहां कमियां हैं उन्हें सुधारा जाए। फुटपाथ को अतिक्रमण मुक्त कर पैदल चलने वालों के लिए सुगम बनाना चाहिए।
-शांति धारीवाल, पूर्व मंत्री व विधायक कोटा उत्तर

यातायात पुलिस का काम ट्रैफिक नियमों की पालना करवाना है। फुटपाथ व जेब्रा क्रॉसिंग की व्यवस्था करना कोटा विकास प्राधिकरण का काम है। रोड सेफ्टी कांग्रेस के सुझावों के आधार पर केडीए, परिवहन समेत अन्य विभाग सुधार कर रहे हैं। शहर में बूंदी रोड समेत कई जगह पर जेब्रा क्रॉसिंग हैं। कई अन्य जगहों पर बनाए जाने हैं। जकि फुटपाथ अ‍े अतिक्रमण हटाना नगर निगम व केडीए की जिम्मेदारी है।
-अशोक कुमार मीणा, उप अधीक्षक, यातायात पुलिस कोटा

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