उधारी के कमरों में चल रहे बेटियों के कॉलेज : कैथून, सुकेत व अकलेरा में स्कूलों में चल रहे महाविद्यालय
कॉलेज एजुकेशन सोसायटी के अधीन संचालित हाड़ौती के 4 कॉलेजों का हाल
कोटा । बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से खोले गए हाड़ौती के चार नए राजकीय कन्या महाविद्यालय खुद ही बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। दो साल बीतने के बाद भी इन कॉलेजों को अपना भवन नसीब नहीं हुआ है। तीन कॉलेज स्कूलों के दो-तीन कमरों में और एक जलदाय विभाग की इमारत में संचालित हो रहा है। खेल मैदान, नियमित फैकल्टी और पर्याप्त संसाधनों की कमी का असर अब एडमिशन पर भी दिखने लगा है। इस सत्र में तीन कॉलेजों की सीटें खाली रह गई, जबकि केवल अकलेरा कॉलेज में सभी सीटें भर चुकी हैं।
यह है मामला
बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने सत्र 2025-26 में कोटा, बूंदी और झालावाड़ जिले के कस्बों में चार नए राजकीय कन्या महाविद्यालय खोले हैं। जिनमें कोटा में कैथून व सुकेत, बूंदी में डाबी और झालावाड़ में अकलेरा शामिल हैं। यह कॉलेज एजुकेशन सोसायटी (राजसेस) के अधीन संचालित हो रहे हैं। इनमें से कैथून, सुकेत व अकलेरा कॉलेज स्कूलों के दो से तीन कमरों में संचालित हो रहे हैं। वहीं, डाबी महाविद्यालय जलदाय विभाग की बिल्डिंग में चल रहा है।
तीन कॉलेज स्कूलों में, एक जलदाय विभाग की बिल्डिंग में
इन चारों कॉलेजों में से कैथून, सुकेत और अकलेरा के महाविद्यालय फिलहाल सरकारी स्कूलों के दो से तीन कमरों में संचालित हो रहे हैं। वहीं, डाबी का कॉलेज जलदाय विभाग की बिल्डिंग में चल रहा है। अस्थायी व्यवस्था के सहारे इन कॉलेजों का दूसरा शैक्षणिक सत्र भी शुरू हो चुका है।
दो साल बाद भी नहीं मिला अपना परिसर
कॉलेज शुरू हुए दो वर्ष होने के बावजूद किसी भी महाविद्यालय को अपना स्थायी भवन नहीं मिल पाया है। छात्राओं के लिए खेल मैदान, पर्याप्त कक्षाएं और अन्य बुनियादी सुविधाएं अभी भी उपलब्ध नहीं हैं। नियमित शिक्षकों की नियुक्ति भी नहीं हुई है। फिलहाल यहां विद्या संबल योजना के तहत अस्थायी शिक्षकों के भरोसे पढ़ाई कराई जा रही है।हालांकि, सरकार ने कुछ कॉलेजों के लिए भूमि आवंटित कर दी है और कुछ स्थानों पर भवन निर्माण का कार्य भी शुरू हो चुका है। अधिकारियों के अनुसार भवन तैयार होने में अभी करीब एक वर्ष का समय लग सकता है।
एक कॉलेज में ही सीटें फुल, तीन में खाली
बुनियादी सुविधाओं की कमी का असर प्रवेश प्रक्रिया पर भी दिखाई दे रहा है। कैथून, सुकेत और डाबी महाविद्यालयों में प्रथम वर्ष की सीटें अभी भी खाली हैं। जबकि, ऑनइलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बीत चुकी हैं। हालांकि, ऑनइलाइन भी लिए गए हैं। वहीं, राजकीय कला कन्या महाविद्यालय अकलेरा में 200 सीटों पर प्रवेश पूरे हो चुके हैं। प्रवेश प्रभारी डॉ. राजकुमार गुप्ता ने बताया कि कस्बे में लंबे समय से बालिका महाविद्यालय की मांग थी। ऑनइलाइन प्रवेश प्रक्रिया के दौरान ही अधिकांश सीटें भर गई थीं और दूसरी सूची जारी होने के बाद सभी सीटों पर प्रवेश हो गया। पिछले वर्ष भी कॉलेज की सभी सीटें भर गई थीं।
अभिभावक : कॉलेज तो खुल गए, सुविधाएं कब मिलेंगी?
कैथून निवासी अभिभावक अमन का कहना है कि बेटियों की उच्च शिक्षा के लिए कस्बे में कन्या महाविद्यालय खुलना अच्छी पहल है, लेकिन दो साल बाद भी कॉलेज का अपना भवन नहीं है। राजकीय पीएम श्री सीनियर सैकंडरी स्कूल में चल रहा है। वहीं, सुकेत निवासी लालचंद का कहना है कि कई परिवार बेटियों को बाहर शहर भेजने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में स्थानीय कॉलेज बड़ी राहत हैं, लेकिन भवन, पुस्तकालय, खेल मैदान और नियमित शिक्षकों जैसी सुविधाएं नहीं है, यह सुविधाएं सरकार को जल्द उपलब्ध करानी चाहिए। इधर, डाबी के अभिभावक मनमोहन का कहना है कि अस्थायी भवनों में चल रहे कॉलेजों के कारण कई अभिभावकों में संशय बना रहता है। यदि स्थायी भवन और बेहतर सुविधाएं मिलें तो अधिक छात्राएं प्रवेश लेने के लिए आगे आएंगी।
सरकार ने सभी नए कॉलजों के लिए जमीन आवंटित कर रखी है। जिन पर वर्तमान में निर्माण कार्य भी चल रहा है। जिनमें कैथून, डाबी, दीगोद, चेचट महाविद्यालय की नई बल्डिंग बन रही है। हालांकि, सुकेत के लिए आवंटित जमीन का मामला कोर्ट में होने से कार्य शुरू नहीं हो पाया। इस साल के अंत तक कई नवीन महाविद्यालय अपने खुद के भवन में शिफ्ट होने की उम्मीद है। सरकार बालिका उच्च शिक्षा को बढ़ावा व क्वालिटी एजुकेशन देने के लिए लगातार प्रयासरत है।
-प्रो. नवीन मित्तल, क्षेत्रिय सहायक निदेशक कॉलेज आयुक्तालय कोटा

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