स्मार्ट सिटी में लापरवाही की तस्वीर! करोड़ों के डिवाइडर हुए बैरंग, टाइलें चोरी और सूखे पौधों ने खोली व्यवस्था की पोल
रखरखाव की कमी, टाइल और केबल चोरी से बिगड़ी शहर की सूरत
कोटा। स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित हो रहे कोटा शहर की खूबसूरती बढ़ाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए डिवाइडर आज अपनी ही बदहाली की कहानी बयां कर रहे हैं। कभी आकर्षण का केंद्र रहे ये डिवाइडर अब जगह-जगह से टूटी टाइलों, सूखे पौधों और चोरी हुए लाइट के केबलों के कारण बदरंग नजर आ रहे हैं। शहर को स्मार्ट बनाने के लिए प्रशासन लगातार योजनाएं बना रहा है, लेकिन यदि सार्वजनिक संपत्तियों का संरक्षण नहीं हुआ और नागरिकों में जिम्मेदारी की भावना विकसित नहीं हुई तो स्मार्ट सिटी का सपना केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।
करोड़ों खर्च, लेकिन सुंदरता पर ग्रहण
शहर की प्रमुख सड़कों पर आकर्षक डिवाइडर बनाकर उन पर महंगी टाइल्स लगाई गई थीं। हरियाली बढ़ाने के लिए पौधारोपण किया गया और आधुनिक लाइटिंग व्यवस्था भी विकसित की गई। उद्देश्य था कि कोटा की पहचान एक आधुनिक और व्यवस्थित शहर के रूप में बने, लेकिन कुछ ही समय में इन विकास कार्यों की चमक फीकी पड़ने लगी। रखरखाव की कमी और चोरी की घटनाओं ने करोड़ों रुपये की इस सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है। शहर के जेडीबी कॉलेज रोड पर लगे विद्युत पोलों से लाइटें चोरी हो चुकि हैं, जिससे रात के समय अंधेरा छाया रहता है। वहीं सर्किट हाउस से रेलवे स्टेशन जाने वाले मार्ग पर बने डिवाइडर अपनी रंगत खो चुके हैं। कई स्थानों पर रंग उखड़ चुका है और रखरखाव के अभाव में वे बदहाल दिखाई देते हैं। दूसरी ओर गुमानपुरा रोड पर डिवाइडरों पर लगी महंगी टाइलें चोरी हो चुकी हैं। कई जगह टाइलें उखड़ी हुई हैं, जिससे पूरे मार्ग की सुंदरता प्रभावित हो रही है। आश्चर्य की बात यह है कि यह सब लंबे समय से हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभागों का ध्यान अब तक इस ओर नहीं गया।
स्मार्ट सिटी से पहले बनना होगा स्मार्ट नागरिक
सार्वजनिक संपत्ति केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे शहर की होती है। यदि कुछ लोग टाइलें और केबल चोरी करेंगे तथा पौधों को नुकसान पहुंचाएंगे और बाकी लोग मूकदर्शक बने रहेंगे तो किसी भी शहर को स्मार्ट नहीं बनाया जा सकता। जरूरत इस बात की है कि नागरिक सार्वजनिक संपत्तियों को अपनी संपत्ति समझें और किसी भी प्रकार की चोरी या तोड़फोड़ की सूचना तत्काल प्रशासन और पुलिस को दें। शहर की पहचान को सुरक्षित रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
शहरवासियों ने कहा कि नगर निगम और संबंधित विभागों को नियमित निरीक्षण कर क्षतिग्रस्त डिवाइडरों की मरम्मत करानी चाहिए। चोरी हुए केबल और टाइलों को तत्काल बदलना चाहिए तथा पौधों का दोबारा रोपण कर उनकी नियमित देखभाल सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही प्रमुख मार्गों पर सीसीटीवी कैमरे लगाकर निगरानी बढ़ाई जाए और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
शहरवासियों ने कहा आखिर करोड़ों की संपत्ति की जिम्मेदारी किसकी?
स्मार्ट सिटी पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा नहीं हो रही। टाइलें और केबल चोरी होना बेहद गंभीर मामला है। प्रशासन को नियमित निगरानी करनी चाहिए।
- शादाब खान, युवा
डिवाइडरों पर लगे पौधे शहर की खूबसूरती बढ़ाते थे। अब अधिकांश पौधे सूख गए हैं या चोरी हो गए हैं। प्रशासन के साथ हमें भी सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करनी होगी।
- तीरथ सांगा, फुटबॉल कोच
स्मार्ट सिटी का सपना तभी पूरा होगा जब लोग खुद जिम्मेदार बनेंगे। चोरी और तोड़फोड़ करने वालों की सूचना देना हर नागरिक का कर्तव्य है।
- बीटा स्वामी, एडवोकेट
इनका कहना है
सूख चुके और चोरी हुए पौधों की जगह जल्द ही नए पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए विभाग की टीम पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती पौधों और डिवाइडरों पर लगी महंगी टाइलों की लगातार हो रही चोरी है। इस संबंध में कई बार संबंधित थानों को लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया जा चुका है। इतना ही नहीं, कई मामलों में केडीए अधिकारियों ने खुद चोरों का पीछा कर उनके वीडियो बनाए, उन्हें पकड़कर पुलिस के हवाले भी किया, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से चोरी की घटनाएं थम नहीं रही हैं। यदि शहर की सुंदरता और सरकारी संपत्ति को बचाना है तो पुलिस को भी अधिक सतर्क और प्रभावी भूमिका निभानी होगी, तभी करोड़ों रुपये की लागत से किए गए सौंदर्यीकरण कार्यों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।
-रवि माथुर, निदेशक अभियांत्रिकी कोटा विकास प्राधिकरण

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