तीन सौ करोड़ खर्च फिर भी चूल्हे के धुंए में सिर देने को मजबूर महिलाएं, कोसों दूर से महिलाओं को कंडे व लकड़ी लाकर चलाना पड़ रहा काम

पानी और गैस नहीं मिलने से परेशान पशु पालक

तीन सौ करोड़ खर्च फिर भी चूल्हे के धुंए में सिर देने को मजबूर महिलाएं,  कोसों दूर से महिलाओं को कंडे व लकड़ी लाकर चलाना पड़ रहा काम

अधिकतर पशु पालक देव नारायण योजना से शहर में कर रहे पलायन।

कोटा। पशु पालकों को बेहतर जीवन यापन करने के लिए तत्कालीन नगर विकास न्यास(केडीए) की ओर से करीब 300 करोड़ रुपए की लागत से तैयार की गई देव नारायण आवासीय योजना के पशु पालक इन दिनों गैस व पानी की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने से परेशान है। जिससे अधिकतर पशु पालक तो वापस शहर में आकर बस रहे हैं।शहर में जगह-जगह पर बाड़े बनाकर रह रहे पशु पालकों को पक्के आवास व पशुओं के लिए बाड़े समेत अन्य सुविधाएं देने के लिए कांग्रेस सरकार के समय में बंधा धर्मपुरा में देव नारायण पशु पालक आवासीय योजना तैयार की गई थी। यहां अलग-अलग श्रेणी के 700 से अधिक आवास बनाए गए थे। जहां उस समय बड़ी संख्या में पशु पालकों को शिफ्ट भी किया गया था। हालांकि वहां पशु पालकों के लिए सभी तरह की सुविधाएं विकसित की गई थी। लेकिन वर्तमान में वहां रह रहे अधिकतर पशु पालक परिवार परेशान हो रहे हैं।

पीने व पशुओं के लिए नहीं पानी
देव नारायण योजना डी ब्लॉक में रह रहे गोविंद गुर्जर का कहना है कि योजना में बड़ी संख्या में पशु पालक रहते हैं। लेकिन वहां पानी की इतनी अधिक समस्या है कि न तो लोगों को पीने का पानी मिल पा रहा है और न ही पशुओं के लिए पानी मिल रहा है। उन्होंने बताया कि वे पिछले काफी समय से टैंकरों से पानी मंगवा रहे हैं। जिस पर हजारों रुपए खर्च कर चुके है। उन्होंने बताया कि यही हालत रही तो उन्हें भी अन्य पशु पालकों की तरह शहर में शिफ्ट होना पड़ेगा।
यह समस्या सी व डी ब्लॉक में अधिक है। जबकि ए व बी ब्लॉक में भी समस्या तो है।

योजना के परिवारों को नहीं मिल रही गैस
स्थानीय निवासी व योजना के पूर्व अध्यक्ष किरण लांगरी का कहना है कि योजना में बायो गैस प्लांट बना हुआ है। पहले तो स्थानीय लोगों को घरों में पाइप से बायो गैस की सप्लाई हो रही थी। लेकिन पिछले कुछ समय से लोगों को गैस ही नहीं मिल रही है। जिससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। योजना में कंडे थापने की जगह नहीं होने से महिलाओं को कोसो दूर से कंडे व लकड़ी लाकर खाना बनाने को मजबूर होना पड़ रहा है।उन्होंने बताया कि केडीए की ओर से प्लांट का संचालन संवेदक के माध्यम से किया जा रहा है। उसके द्वारा योजना से बाहर गैस की सप्लाई की जा रही है। जबकि सबसे पहले योजना के परिवारों को गैस मिलनी चाहिए।

वंचितों को भी मिले आवास
लांगरी ने बताया कि योजना में केडीए को सुविधाएं तो विकसित करनी चाहिए तभी लोग यहां रूकेंगे। हालांकि पूर्व में आवंटितों में से करीब 50 से 70 परिवार ऐसे हैं जिन्हें आवासों का आवंटन किया जाना है। उन्हें भी आवंटन किया जाए और सुविधाओं को बेहतर बनाया जाए। इस संबंध में केडीए अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है।

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करीब 300 परिवारों ने किया पलायन
स्थानीय निवासी मोहन गुर्जर का कहना है कि योजना में शुरूआत में जितने परिवारों का पुनर्वास किया गया था। उनमें से करीब आधे 300 परिवार तो वापस कोटा शहर में पलायन कर चुके हैं। जिस तरह की सुविधाएं शुरूआत में दी जा रही थी। वे वर्तमान में नहीं मिल रही हैं। यदि यही हालत रही तो अन्य परिवारों को भी शहर में जाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

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इनका कहना है
देव नारायण योजना में वर्तमान में 1250 केएलडी का पानी का प्लांट है। जिससे पानी की सप्लाई हो रही है। उस समय की जरूरत के हिसाब से वह पर्याप्त था। लेकिन अब जरूरत को देखते हुए यहां एक पानी की टंकी और बनाई जाएगी। जिसके दो से तीन माह में बनकर तैयार होने की संभावना है। लेकिन पानी की सप्लाई तो अमूत 2.0 के तहत ही मिल पाएगा। उसी तरह गैस सप्लाई दो चरणों में किया जाना था। पहले चरण में ओएंडएम के तहत सप्लाई की जा रही थी। पहले सप्लाई कम थी। लेकिन अब सप्लाई पर्याप्त है। शीघ्र ही केडीए की कार्यकारी समिति की बैठक में एजेंडा रखकर उस पर निर्णय किया जाएगा। जिसके बाद शीघ्र ही योजना के लोगों को भी गैस की सप्लाई मिलने लगेगी।
मुकेश चौधरी, सचिव, कोटा विकास प्राधिकरण

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